बहराइच। रेलवे में टिकट कलेक्टकर (टीसी) की नौकरी दिलाने के नाम पर बहराइच के सात बेरोजगारों से 50 लाख रुपये ठग लिए गए। यह ठगी एक पूर्व सभासद के माध्यम से गोंडा में सक्रिय गैंग ने की है।
गैंग के एक सदस्य ने अपने पिता को रेलवे का बड़ा अधिकारी बताकर टीसी की नौकरी दिलाने के लिए किसी से छह लाख तो किसी से सात लाख वसूले।
फर्जी रेलवे मेडिकल बोर्ड से चिकित्सीय परीक्षण करवाया। फिर ईस्टर्न रेलवे में टीसी के पद पर नौकरी का फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया।
बेरोजगार जब कोलकाता के हाबड़ा रेलवे स्टेशन पर जॉइन करने पहुंचे तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पीड़ितों ने इस मामले में एसपी को पत्र सौंपा है। एसपी ने जांच टीम गठित की है।
रिसिया थाना क्षेत्र के देवीपुरा मोहल्ला निवासी इफ्तिखार अहमद ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक सालिकराम वर्मा को पत्र सौंपा। पत्र में इफ्तिखार ने बताया है कि वर्ष 2013 में उसकी मुलाकात दरगाह शरीफ थाना क्षेत्र अंतर्गत सलारगंज निवासी पूर्व सभासद सईद से हुई थी।
उसने अपनी जान पहचान के लोगों से रेलवे में नौकरी दिलाने की बात कही थी। सईद ने गोंडा के कोतवाली नगर क्षेत्र अंतर्गत आवास विकास कॉलोनी निवासी सलीम, शाबान, वसीम और चौक बाजार गोंडा निवासी इबाद अनवर से मुलाकात करवाई।
इफ्तिखार का कहना है कि सलीम और वसीम ने अपने पिता को रेल महकमे के बड़े अधिकारी होने की बात कही। यह भी कहा कि रेलवे में टीसी की नौकरी के लिए सात लाख रुपये खर्च होंगे। इफ्तिखार झांसे में आ गया।
उसका कहना है कि दो लाख रुपये उसने नकद दे दिए, जबकि शेष रकम के लिए एक माह का समय सभी ने दिया। इसके बाद चार लाख 63 हजार पांच सौ रुपये सलीम और वसीम के खातों में इफ्तिखार ने जमा करवाया।
इफ्तिखार के साथ ही दरगाह क्षेत्र निवासी मोहम्मद हनीफ, नई बस्ती निवासी रामबहादुर, कोतवाली नगर क्षेत्र निवासी हनीफ, रमेश कुमार समेत सात युवकों ने पांच लाख से सात लाख रुपये टीसी की नौकरी के लिए अदा किए।
बेरोजगारों का कहना है कि फरवरी से मार्च के बीच 45 लाख रुपये दिए गए। इस दौरान गिरोह के लोगों ने सभी को मेडिकल एग्जामीनेशन के लिए कॉल लेटर थमाया, जिस पर रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड कोलकाता की मुहर लगी थी।
27 फरवरी से छह मार्च के बीच सभी बेरोजगारों का फर्जी मेडिकल बोर्ड बनवाकर चिकित्सकीय परीक्षण कोलकाता में करवा दिया गया। फिर 22 अप्रैल 2013 को ईस्टर्न रेलवे में टीसी पद पर नौकरी का नियुक्ति पत्र जारी कर सभी को नौकरी जॉइन करने के लिए कोलकाता बुलाया गया।
नियुक्ति पत्र पर रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड के असिस्टेंट सेक्रेटरी की मुहर लगाई हुई थी। पे स्केल 5220-20200 अंकित थी। नियुक्ति पत्र लेकर जब बेरोजगार कोलकाता पहुंचे तो इस तरह की किसी भी नियुक्ति न होने का पता चला।
हावड़ा रेलवे स्टेशन अधीक्षक ने जब पड़ताल की तो नियुक्ति पत्र फर्जी निकला। इस पर बेरोजगारों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
इफ्तिखार व अन्य सभी का कहना है कि वह सभी भागकर बहराइच पहुंचे और अपना पैसा मांगना शुरू किया तो साल भर तक सभी टाल मटोल करते रहे और अब जानमाल की धमकी दे रहे हैं। अब एसपी को पत्र देकर पीड़ितों ने रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी का खुलासा किया है।
गठित की गई जांच टीम
रेलवे में टीसी की नौकरी देने के नाम पर प्रायोजित तरीके से ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में बेरोजगार पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर प्रभारी निरीक्षक डॉ. डीएन सिंह को जांच सौंपी गई है।
जांच पूरी होने के बाद केस दर्ज कर मामले में कार्रवाई शुरू की जाएगी। लग रहा है कि एक बड़ा रैकेट है जो बेरोजगारों को निशाना बना रहा है। जल्द खुलासा करेंगे।
- सालिकराम वर्मा, पुलिस अधीक्षक