करीब साल भर पूर्व रेप के बाद एक किशोरी की हत्या की कोशिश की घटना में दरगाह थाने की पुलिस चुप्पी साधे रही। उसने कार्रवाई नहीं की। इस पर किशोरी की मां ने हाईकोर्ट की शरण ली। न्यायालय ने इस मामले गंभीर रूख अपनाते हुए तत्कालीन पांच एसओ से कोर्ट में ही जुर्माना वसूला।
इस मामले में पुलिस महानिदेशक को भी पत्र भेजा गया है। कोर्ट में बहराइच पुलिस की किरकरी होने के बाद एसपी ने सख्ती दिखाई और आरोपी पांच एसओ के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। पुलिस ने आनन फानन में केस दर्ज किया।
दरगाह शरीफ थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले की रहने वाली महिला सुरक्षा महकमे की कर्मचारी है। महिला की 14 वर्षीय बेटी के सा एक युवक ने साल भर पूर्व रेप किया। आरोप है कि किशोरी के गर्भवती होने पर उसे गर्भपात की दवा पिलायी और छत से फेंक कर मारने की कोशिश की।
इस मामले में महिला ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया। स्थानीय न्यायालय की भी शरण ली। न्यायालय ने केस दर्ज कर कार्रवाई करने के आदेश दिए लेकिन दरगाह पुलिस चुप्पी साधे रही। इस पर महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने दरगाह पुलिस की कार्यशैली और किशोरी के साथ हुए अपराध के मामले में दो दिन पूर्व सुनवाई की। न्यायालय ने दरगाह थाने के तत्कालीन थाना प्रभारियों जितेंद्र सिंह, अखिलेश मिश्र, शुभ सूचित वर्मा, सरफराज और अजीत वर्मा को दोषी मानते हुए उन पर 75 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका।
थानाध्यक्षों से न्यायालय में ही जुर्माना वसूला गया। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजय लांबा और रवींद्र नाथ मिश्र द्वितीय ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत थानों पर एफआईआर में हीलाहवाली न बरतने की बात कही गई है।
इस मामले में एसपी सालिक राम वर्मा का कहना है कि अभी न्यायालय के आदेश की कापी नहीं मिली है। न्यायालय के आदेश का पता चला है। दरगाह के तत्कालीन थानाध्यक्षों के खिलाफ न्यायालय ने जुर्माना किया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। एएसपी जांच कर रहे हैं। रेप और अपहरण के मामले में कोताही करने वाले एसओ को बख्शा नहीं जाएगा।