लखनऊ निवासी एक बालक अपने पिता की पिटाई से क्षुब्ध घर से भाग निकला और ट्रेन से रुपईडीहा पहुंच गया। यहां एक व्यक्ति ने उसे ढाबा पर प्लेट धोने के काम पर रख लिया। इसकी जानकारी जब कस्बा के लोगों को हुई तो सभी ने चाइल्ड लाइन को सूचना देकर बालक को छुड़ाकर एसएसबी को सौंप दिया है।
लखनऊ से ट्रेन द्वार रुपईडीहा के नेपालगंज रोड रेलवे स्टेशन पर दो दिन पूर्व एक 10 वर्षीय बालक पहुंच गया। दिन भर वह इधर-उधर भटका और रात में रेलवे स्टेशन पर ही सो गया। भोर में जब वह पेट की भूख मिटाने के लिए दुकानदारों के पास पहुंचकर नाश्ता मांग रहा था तभी उस पर कस्बा निवासी एक व्यक्ति की नजर पड़ी। उसने बालक को अपने परिचित के यहां ढाबे पर नौकरी दिला दी।
कस्बे के लोगों को जब इसका पता चला तो सभी ने चाइल्ड लाइन को सूचना दी। साथ ही, बालक को ढाबे से छुड़ाकर एसएसबी रुपईडीहा बार्डर आउटपोस्ट के जवानों के सुपुर्द कर दिया। जवानों की पूछताछ में बालक ने अपना नाम नरसिंह और पिता का नाम अमरनाथ बताया। कहा कि वह लखनऊ का निवासी है।
कक्षा तीन में पढ़ता था। अपने दो भाइयों के नाम दीनानाथ और चंद्रिका बता रहा है, जबकि मां की अरसा पूर्व मौत की बात कह रहा है। बालक का कहना है कि पिता मजदूरी करते हैं, जबकि भाई ईंट भट्ठे पर काम करते हैं। नरसिंह के मुताबिक उसका पिता शराबी है और उसे मारता-पीटता है। इससे परेशान होकर लखनऊ में ट्रेन पर सवार हो गया।
बालक को ढाबे पर नौकरी दिलाने की जानकारी होने पर समाजसेवी शेरसिंह कसौंधन ढाबे पर पहुंचे तो वहां पर बालक झाड़ू लगा रहा था। इस इस पर उन्होंने एसएसबी के कांस्टेबिल पंकज भारती को सूचना दी। इसके बाद बालक को ढाबे से छुड़ाकर एसएसबी के हवाले कर दिया। सहायक सेनानायक दिनेश कुमार ने बताया कि चाइल्ड लाइन की मदद से बालक को लखनऊ भेजा जा रहा है।