संरक्षित वन क्षेत्र में बाघ को मारने के लिए चार दिन जमे नेपाली शिकारियों को वन विभाग ने एसएसबी के साथ घेर लिया। संयुक्त टीम ने एक शिकारी को पकड़ने के साथ दो बंदूक, बारूद के साथ बारहसिंगा की छह सींग बरामद की हैं। उसके चार साथी घेराबंदी के बावजूद फरार हो गए।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र वर्षाकाल में पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित रहता है। चहल-पहल कम होने पर नेपाल के शिकारियों की नजर जंगल केबाघ व अन्य दुर्लभ वन्यजीवों पर रहती है। बाघ के शिकार के लिए नेपाल के शिकारियों का समूह सीमा पार कर जंगल में घुस आया था।
यह सूचना वन विभाग को मिली तो डीएफओ ने एसएसबी के अधिकारियों से संपर्क साधा। संरिक्षत वन क्षेत्र से सटी नेपाल सीमा को सील कर कांबिंग शुरू करवाई। डीएफओ के मुताबिक सीमा से सटे धर्मापुर रेंज क्षेत्र में कांबिंग के दौरान नेपाल सीमा की ओर जाते एक संदिग्ध को टीम ने पकड़ लिया।
पूछताछ में उसकी पहचान गणेश लोध पुत्र छोटेलाल निवासी छेदापुर वार्ड नंबर एक नेपाल के रूप में हुई। गणेश ने बताया कि उसके साथ चार शिकारी और थे। वे जंगल में असलहे छिपाकर सीमा पार फरार हो गए हैं।
गणेश की निशानदेही पर धर्मापुर रेंज के जंगल से दो भरुआ बंदूक, एक बैरल, गन पाउडर 0.85 ग्राम, शीशे के टुकड़े, छर्रे, 13 गन कैप, दो बोगदा व अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। जंगल में छिपाकर रखी गई बारहसिंगा की छह सींग भी बरामद हुई है।
गणेश ने बताया कि उनका गुट बाघ के शिकार की टोह में था। डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि फरार चार शिकारियों की तलाश में नेपाल के वनाधिकारियों व सुरक्षा बलों से संपर्क साधा गया है। इसके साथ टीम बनाकर जंगल में सघन गश्त के निर्देश दिए गए हैं।