बहराइच। 18 साल पहले दहेज के लिए बहू की हत्या करने वाले सास-ससुर को गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश सुदामा प्रसाद ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 11-11 हजार रुपये का अर्थदंड भी कोर्ट ने लगाया है।
हत्या आरोपी आरोपी पति की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है। बुजुर्ग दंपती को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत हंसरामपुरवा गांव निवासी विनोद कुमार ने आठ अगस्त 1997 को थाने पर तहरीर दी थी। उसने बताया था कि उसकी बहन नीलम उर्फ पुष्पा देवी का विवाह कांधभारी गांव निवासी राकेश कुमार शुक्ल से 1993 में हुआ था।
शादी के बाद से ही नीलम को ससुराल के लोग दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। इस पर विनोद अपनी बहन को ससुराल से मायके ले आया था। न्यायालय पर भरण पोषण का केस दायर किया गया था। इसके बाद 16 जून 1997 को ससुराल के लोगों ने सुलह कर लिया था।
विनोद ने पुलिस को बताया था कि डेढ़ महीने बाद जब नाग पंचमी पर वह बहन की विदाई कराने उसके ससुराल पहुंचा तो ससुराल के लोगों ने नीलम को विदा करने से मना कर दिया।
दूसरे दिन गांव के लोगों ने विनोद को नीलम के मौत की सूचना दी। विनोद ने नीलम के पति राकेश कुमार, ससुर रामअक्षर सिंह और सास शेषपती को नामजद करते हुए थाने पर दहेज हत्या की तहरीर दी थी।
नीलम के शव के पोस्टमार्टम में भी दम घुटने से उसकी हत्या की पुष्टि हुई। मुकदमे के दौरान इन सभी ने अपनी जमानत करवा ली थी। दो साल बाद पति राकेश की भी मौत हो गई।
गुरुवार को दीवानी न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश सुदामा प्रसाद ने मामले की सुनवाई की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह और बचाव पक्ष के वकील ने बहस की।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने नीलम की सास शेषपती (70) और ससुर रामअक्षर सिंह (72) को बहू की हत्या का दोषी पाया। अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों को आजीवन कारावास और 11-11 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।