हत्या के मामले में निर्दोष को जेल भेजने वाले जांच अधिकारी व तत्कालीन एसओ को जिला जज न्यायालय ने मंगलवार को जेल भेज दिया। वहीं, मामले का सुपरविजन कर रहे तत्कालीन सीओ सीओ विजय त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेज कर निर्देशित किया है।
वर्ष 2010 में सिरसिया थाना क्षेत्र में एक अज्ञात लाश पुलिस ने बरामद की थी, जिसकी जांच तत्कालीन थानाध्यक्ष रामसुमेर त्रिपाठी द्वारा की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की पहचान गौतम सिंह निवासी गोठवा बहोल खंड थाना जरवा बलरामपुर के रूप में की थी।
तब इसका भी खुलासा किया कि उसकी हत्या उसी के पट्टीदारी के चाचा दलपत सिंह द्वारा की गई है। चार्जशीट में उल्लेख किया था कि आरोपी दलपत सिंह द्वारा अपने भतीजे की हत्या का जुर्म स्वीकार किया है। इसके बाद आरोपी को काफी दिनों तक जेल में रहना पड़ा।
वहीं एक अक्टूबर 2010 को पुलिस ने जिसको मृतक दिखाया था, उसने कोर्ट में उपस्थित होकर स्वयं को जिंदा बताया। इस पर कोर्ट ने दलपत सिंह को आरोप मुक्त कर दिया। इसके बाद दलपत ने मामले में फर्जी गवाही देने वाले तथाकथित मृतक के परिवारीजनों सहित जांच अधिकारी थानाध्यक्ष रामसुमेर त्रिपाठी के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया था। इसमें मजिस्ट्रेट द्वारा थानाध्यक्ष को बरी कर दिया गया था।
इसी मामले में अपील की सुनवाई करते हुए कुछ दिन पूर्व जिला जज सैय्यद मोहम्मद हसीब ने जांच अधिकारी रामसुमेर त्रिपाठी को कोर्ट में तलब होने का आदेश दिया था। आदेश के बाद मंगलवार को जांच अधिकारी रामसुमेर त्रिपाठी जिला जज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुए थे।
इस दौरान जांच अधिकारी द्वारा कोर्ट के समक्ष दी रिपोर्ट के संबंध में स्पष्टीकरण न देने पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सीजेएम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सुसंगत धाराओं में परिवाद चलाने का निर्देश दिया था।
निर्देश के बाद सीजेएम निरंजन कुमार ने जांच अधिकारी को जेल भेज दिया। इसके साथ ही एसपी श्रावस्ती को पत्र लिखकर बरामद लाश किसकी थी। हत्या किसने की, सहित अन्य बिंदुओं पर जांच कर एक माह में न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।