तराई में बढ़ रही गर्मी के बीच डायरिया और बुखार कहर बरपाने लगा है। जिला अस्पताल में डायरिया व बुखार से पीड़ित भर्ती चार मासूमों की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं 19 और मरीज भर्ती हुए हुए हैं। इनमें तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।
तराई में मौसम में परिवर्तन होने से संक्रामक रोगोें का प्रकोप बढ़ने लगा है। हालात यह हैं कि निमोनिया का प्रकोप थमने के साथ ही डायरिया और बुखार की जद में बच्चे आने लगे हैं। मरीजों की संख्या में भी धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है।
हरदी थाना क्षेत्र के खरिहा गांव निवासी कीर्ति (2) पुत्री उमेश को सोमवार को दोपहर उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत हुई। परिवारीजनों ने स्थानीय चिकित्सकोें से इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर देर शाम उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पर इलाज के दौरान मंगलवार सुबह कीर्ति की तबियत और बिगड़ गई। डॉक्टरों ने काफी कोशिश की, लेकिन उसने दम तोड़ दिया।
उधर, विशेश्वरगंज के कंजवा गांव निवासी विमला देवी (20 माह) पुत्री संतोष को भी उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल मेें भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान दोपहर बाद विमला ने दम तोड़ा। वहीं, श्रावस्ती के इकौना क्षेत्र निवासी सहनवाज की एक वर्षीय पुत्री आसिमा तथा बलरामपुर निवासी बाबू (एक) पुत्र इमरान को भी उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत पर अस्पताल लाया गया। यहां इलाज शुरू होेते ही दोनों ने दम तोड़ दिया। वहीं, जिला अस्पताल में बुखार, उल्टी, दस्त आदि से पीड़ित और 19 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें जकी (2), प्रताप (डेढ़) और संदीप (3) की हालत नाजुक बताई जा रही है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. डीके सिंह का कहना है कि परिवारीजन शुरूआती दौर में स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। रोग के सापेक्ष इलाज न मिलने से मरीज की हालत बिगड़ती है, तब उसे जिला अस्पताल लाते हैं। ऐसे में काफी कोशिश की जाती है। उन्होंने बताया कि कीर्ति समेत दम तोड़ने वाले अन्य मरीजों की हालत काफी गंभीर थी।