बहराइच। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत बहराइच डिपो में बड़ा निर्णय सामने आया है। 90 प्रतिशत मूक-बधिर दिव्यांग यात्री के साथ अभद्रता व जबरन टिकट बनाने के मामले में दोषी पाए गए संविदा परिचालक गौरव प्रणामी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने आदेश जारी कर उसकी जमा प्रतिभूति राशि भी जब्त कर ली है।
यह मामला 17 सितंबर 2025 का है, जब उर्रा बाजार, मोतीपुर निवासी दिव्यांग वरुण कुमार गुप्ता अपनी 10 वर्षीय पुत्री उन्नति के साथ बहराइच से लखनऊ जा रहे थे। आरोप है कि बस संख्या यूपी 78 एलएन-1347 के परिचालक ने उनका यूडीआईडी कार्ड मानने से इन्कार कर दिया और बस से उतारने की धमकी दी। बच्ची के रोने पर मजबूर होकर उन्हें टिकट लेना पड़ा।
पीड़ित ने पहले एआरएम स्तर पर शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। इसके बाद मामला संज्ञान में आया और आरएम देवीपाटन मंडल द्वारा जांच बैठाई गई। 28 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में पीड़ित की पुत्री ने भी बयान दर्ज कराया। जांच में परिचालक दोषी पाया गया और उसका ‘नियम की जानकारी नहीं थी’ का तर्क खारिज कर दिया गया।
16 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि परिचालक के कृत्य से परिवादी को मानसिक व आर्थिक क्षति हुई। इसके आधार पर उसकी संविदा समाप्त कर दी गई।
मुआवजे के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे
पीड़ित वरुण कुमार गुप्ता ने इसे बड़ी जीत बताते हुए कहा कि वह बोल-सुन नहीं सकते, लेकिन कानून ने उनकी आवाज सुनी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और परिवहन निगम का आभार जताया, साथ ही कहा कि अब वह मुआवजे के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच में उनके मामले को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिसे लेकर वे आगे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।