फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस को फिर वनवास

Sat, 11 Mar 2017 10:27 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
विज्ञापन
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव के मतगणना परिणाम ने बहराइच में कांग्रेस को करारा झटका दिया है। वर्ष 2012 की सीटों को भी कांग्रेस नहीं सहेज सकी। 2012 में 22 वर्ष बाद कांग्रेस ने खाता खोला था। वह भी इस बार गंवा दिया। इसे कांग्रेस-सपा गठबंधन का विरोध मानें या मतदाताओं के परिवर्तन की भावना। इस पर मंथन चलेगा। लेकिन इतना जरूर है कि बहराइच में कांग्रेस अपना अस्तित्व नहीं बचा पाई। वहीं, बसपा ने भी अपनी एक मात्र सीट गंवा दी। प्रदर्शन काफी खराब रहा।
विज्ञापन


बहराइच के चुनाव परिणाम शनिवार को जब सामने आए तो कांग्रेस और बसपा की हवा निकल गई। इस बार कांग्रेस ने सपा से गठबंधन कर नानपारा, महसी, और पयागपुर विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों को उतारा था। नानपारा से वारिस अली मैदान में थे। जबकि महसी में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अली अकबर और पयागपुर में भगतराम मिश्रा ताल ठोंक रहे थे।

गौरतलब हो कि नानपारा और पयागपुर विधानसभा सीटों पर वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 22 वर्ष बाद खाता खोलते हुए जीत दर्ज की थी। इस बार कांग्रेस को उम्मीद थी कि गठबंधन के चलते सपा के मतों का लाभ मिलेगा और तीन सीटें निकलेंगी। लेकिन जब चुनाव परिणाम सामने आए तो पयागपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार भगतराम मिश्रा की जमानत जब्त हो गई। उन्हें सिर्फ 4226 वोट हासिल हुए।
विज्ञापन


नानपारा में वारिस अली ने पार्टी की इज्जत रखी और रनर प्रत्याशी के रूप में दूसरे नंबर पर रहते हुए 67546 वोट हासिल किए। महसी में भी अली अकबर ने जबरदस्त टक्कर दी। 45763 वोट पाकर रनर रहे। गौरतलब हो कि महसी एक ऐसी सीट है, जहां 2012 के चुनाव में बसपा खाता खोल सकी थी। लेकिन इस बार बसपा ने यह सीट गंवा दी। बसपा प्रत्याशी केके ओझा 34496 मत पाकर तीसरे नंबर पर रहे।  

कांग्रेस ने वर्ष 1989 से 2007 के मध्य छह चुनाव में एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं की। 1996 से 2007 के मध्य जिले में सभी छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस जमीन तलाशती नजर आई थी। किसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दो प्रतिशत तो किसी में पांच प्रतिशत मत ही हासिल कर सके थे। 

वर्ष 2017 के चुनाव में बहराइच में कांग्रेस का अस्तित्व बचाने के लिए सभाएं कीं। राहुल गांधी ने बौंडी व नानपारा तथा अखिलेश ने चार जनसभाआें को संबोधित किया, लेकिन मतदाताओं को अपनी ओर मोड़ नहीं पाए। 

1952 में पयागपुर विधानसभा क्षेत्र बना था। यहां पर कांग्रेस प्रत्याशी जमुना प्रसाद पहली बार सदन पहुंचे थे। 1957 में भी कांग्रेस का दबदबा रहा। लेकिन वर्ष 1962 में पयागपुर सीट खत्म कर दी गई थी। उसके बाद वर्ष 2012 में नए परिसीमन के तहत सीट अस्तित्व में आई और कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश चुनाव जीते थे। वहीं 1985 में नानपारा में कांग्रेस के टिकट से देवतादीन चुनाव जीते थे। लेकिन वर्ष 1989 से कांग्रेस को नानपारा में ठौर नहीं मिल सकी थी। 2012 में कांग्रेस में शामिल हुईं माधुरी वर्मा ने कांग्रेस का परचम लहराया था।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें