गांवों की सरकार का ताज इस बार ज्यादातर युवाओं के सिर सजा है। मतदाताओं ने अपने गांव के विकास की बागडोर युवा प्रत्याशियों के हाथ में थमाई है। 1054 ग्राम पंचायतों में से 556 ग्राम पंचायतों में महिलाओं व युवाओं को मतदाताओं ने गांव का मुखिया चुना है। प्रधानी की सीट पर कब्जा जमाने वाले ज्यादातर प्रत्याशी 25 से 40 आयु वर्ग के हैं। यही नहीं, साक्षर लोगों पर भी वोटरों ने भरोसा जताया है। इस होड़ में 23 वर्ष की रूपाली ने सबसे कम उम्र की प्रधान बनकर मिसाल पेश की है। वहीं वृद्ध प्रधान के रूप में चित्तौरा के बेगमपुर की 72 वर्षीय मखाना शामिल हैं।
पंचायत चुनाव में इस बार नए परिसीमन के तहत जनपद की 1054 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराए गए। इनमें ग्राम प्रधान के 1054 पदों के लिए 8558 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। रविवार सुबह मतगणना शुरू हुई तो चुनाव जीतने वाले अधिकांश चेहरे युवा नजर आए। इनकी उम्र 25 से 40 वर्ष के बीच है। 1054 में से लगभग 800 पदों के चुनाव परिणाम रविवार देर रात तक घोषित हो गए हैं। इनमें युवा चेहरे 65 फीसदी के आसपास है। संख्या भी लगभग 510 है। युवाओं को गांव की सरकार की बागडोर संभालने के लिए पहली बार जिले के मतदाताओं ने इतनी बड़ी संख्या में चुना है।
दोपहर में मिहींपुरवा विकासखंड का परिणाम जब घोषित होना शुरू हुआ तो एक बजे के आसपास मिहींपुरवा के ग्राम कतर्निया से 23 वर्ष की रूपाली विश्वकर्मा सबसे कम उम्र की महिला प्रधान निर्वाचित हुईं। इनकी शैक्षिक योग्यता परास्नातक तक है। 804 मतों से रूपाली विजयी हुई हैं, जबकि विकासखंड फखरपुर के ग्राम सराय जगन से 28 साल के मन्नान खां, पुरुष वर्ग में सबसे कम उम्र के प्रधान बने हैं। इनके पास स्नातक की डिग्री है। वहीं, वृद्घ प्रधान में विकास खंड चित्तौरा के रामगांव बेगमपुर की 72 वर्षीय मखाना चुनाव जीती हैं। साक्षरता की बात करें तो चुनाव जीतने वाले 85 फीसदी प्रधान सिर्फ पढ़े लिखे हैं, जबकि 10 फीसदी प्रधान स्नातक और परास्नातक योग्यताधारी हैं।