नगर पालिका के पास अलाव जलाकर हाथ सेंकते लोग।
- फोटो : नगर पालिका के पास अलाव जलाकर हाथ सेंकते लोग।
बहराइच। तराई में मंगलवार को मौसम का मिजाज पल-पल बदलता रहा। सुबह कड़ाके की सर्दी से जनमानस कांप रहा था। दोपहर बारिश हुई हो गई। इससे किसानों को चिंता सताने लगी कि यदि ओले गिरे तो फसल चौपट हो जाएगी। हालांकि, कुछ देर की बारिश के बाद धूप निकल आई। इससे किसानों ने राहत महसूस की।
तराई का मौसम इस बार पिछले कई सालों से अलग रहा। इस बार 16 दिसंबर से सर्दी का दौर शुरू होने के बाद अब तक मौसम कई रंग दिखा चुका है। कई बार उतार-चढ़ाव देखे गए। पिछले दो दिन धूप खिली तो लोगों ने समझा कि फाल्गुन माह आ गया और अब सर्दी विदा हो गई है, लेकिन मंगलवार को जब लोगों की आंख खुली तो कोहरे के साथ आसमान में भी बादल छाए मिले। सर्द हवा ने ठंड को और बढ़ा दिया। ऐसा लग रहा था कि पूरे दिन धूप नहीं निकलेगी। इस बीच अचानक बारिश शुरू हो गई। इससे किसान ओले गिरने की आशंका से सहम उठे। गनीमत रही की बारिश थम गई और गुनगुनी धूप निकल आई।
सांस और बुखार के मरीज बढ़े
मौसम में उतार-चढ़ाव से सांस और बुखार के मरीज बढ़ गए हैं। हृदय रोगियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फिजिशियन डॉ. राकेश चौधरी ने बताया कि सर्दी के समय खून गाढ़ा होने से उसका हृदय में प्रवाह धीमा होने या रुकने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सभी को अपना शरीर गर्म रखने के लिए गुनगुना पानी पीना चाहिए। इसके अतिरिक्त कान और चेहरा ढक कर रखना चाहिए।
फसलों को झुलसा रोग से बचाएं किसान
सर्दी के मौसम में फसलों को झुलसा रोग लगने की संभावना रहती है। उद्यान विशेषज्ञ आरके वर्मा बताते हैं कि इसके लिए फसलों को समय-समय पर पानी देते रहना चाहिए। साथ ही खेतों के आस-पास आग जलानी चाहिए, जिससे फसलों को सर्दी से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सर्दी में फसलों की सुरक्षा एक प्रकार की चुनौती रहती है।