बौंडी। सरयू के कछार क्षेत्र में भेड़ियों का हमला बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार दोपहर बाद मंझारा तौकली के देवनाथपुरवा गांव में भेड़िया घर के सामने खेल रहे अनिकेश (8) को जबड़े में दबाकर खेतों की ओर भागने लगा। ग्रामीणों के दौड़ाने पर बच्चे को खेत में छोड़ दिया। इस बीच वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जिसे सीएचसी फखरपुर में भर्ती कराया गया है।
विजय कुमार का पुत्र अनिकेश दोपहर बाद घर के बाहर खेल रहा था, तभी उसकी चीख सुनाई पड़ी। इसपर परिजन बाहर निकले। देखा कि भेड़िया अनिकेश को जबड़े में दबाकर भाग रहा है। ग्रामीणों के साथ मिलकर लाठी-डंडों के साथ भेड़िये को दौड़ा लिया।
इसपर करीब 200 मीटर दूर भेड़िया अनिकेश को खेत में छोड़कर गन्ने में भाग गया, लेकिन तब तक अनिकेश गंभीर रूप से जख्मी हो चुका था। खून से लथपथ उसे सीएचसी फखरपुर ले जाया गया।
चार बच्चों की मौत, 18 से ज्यादा लोग घायल
सरयू कछार में पिछले दो महीने से भेड़िये का हमला हो रहा है। अब तक चार बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि 18 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण दहशत में हैं। ऐसे में वे अब लाठी-डंडों और धारदार हथियार लेकर घर से निकल रहे हैं।
वन विभाग की नाकामी पर गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग अब तक भेड़ियों को पकड़ने में नाकाम रहा है। हर हमले के बाद सिर्फ जाल बिछाने की बात कही जाती है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता। इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हिंसक वन्यजीवों की खोज के लिए विशेषज्ञ लगातार गश्त कर रहे हैं। ग्रामीणों को हमलों से बचाने के लिए अब तक 1390 से अधिक स्ट्रीट लाइटें, 61 सोलर लाइटें लगाई गई हैं। प्रभावित गांवों में 18 पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि तुरंत अलर्ट किया जा सके।
अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी बहराइच
भेड़िये को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया है। टीम लगातार निगरानी कर रही है। उम्मीद है कि जल्द हमं सफलता मिल जाएगी।
ओंकार नाथ यादव, रेंजर
भेड़िया प्रभावित गांव में पहुंचे डीएम
भेड़ियों के हमलों से दहशत में जी रहे ग्रामीणों से मिलने बुधवार देर रात डीएम अक्षय त्रिपाठी गांव पहुंचे। उन्होंने फखरपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत मंझारा तौकली के मजरा बाबा बंगला का भ्रमण किया। भेड़िये की शिकार हुई तीन वर्षीय बच्ची सोनी के परिवार से भी मिले। डीएम ने परिवार को आश्वासन दिया कि हर कदम पर प्रशासन उनके साथ है। इस मौके पर एएसपी नगर रामानंद कुशवाहा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह, पूर्व प्रमुख मुन्ना सिंह, सत्यदेव सिंह भी मौजूद रहे।
सपा नेताओं ने डीएम से की मुलाकात
सपा के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मुलाकात कर भेड़ियों से निजात दिलाने की मांग की। जिला महासचिव सुनील निषाद ने कहा कि शासन-प्रशासन की लापरवाही से भेड़िया प्रभावित पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। एक बच्ची का अभी तक पता नही चल सका है। सपा नेताओं ने मृतक के परिजनों को 10-10 लाख व घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग की। शैलेश सिंह ने शैलू ने कहा कि घायलों के लिए तत्काल बेहतर इलाज की व्यवस्था कराई जाय।
अंबेडकर वाहिनी की आंदोलन की चेतावनी
अंबेडकर वाहिनी के जिलाध्यक्ष पेशकार राव ने कहा कि प्रशासन प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल व वन विभाग की टीम लगाए। इससे ग्रामीण खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगे। ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। लोहिया वाहिनी जिलाध्यक्ष नंदेश्वरनंद यादव ने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा पुख्ता करनी होगी।
पांडेपुरवा में मवेशी को किया घायल
ग्राम पांडेपुरवा निवासी अकरु पांडेय का बछड़ा बुधवार रात खूंटे से बंधा था। देर रात भेड़िये ने उसे मार डाला। ग्राम प्रधान भगवान दीन मिश्रा ने पुलिस और वन विभाग को सूचना दी है।
वन विभाग ने मांगी भेड़िये को मारने की अनुमति
बौंडी। सरयू नदी के कछार में भेड़िये लगातार हमला कर वन विभाग को छका रहे हैं। पिछले 15 दिनों से छह गांवों के लोग दहशत में जी रहे हैं। वन विभाग ने हार मानते हुए अब राज्य सरकार से भेड़िये के शूट आउट की अनुमति मांगी है।
कैसरगंज और महसी के कछार क्षेत्र में सक्रिय भेड़िये को पकड़ने के लिए वन विभाग एक माह से सघन सर्च ऑपरेशन चला रहा है। ड्रोन की मदद ली गई, ट्रैप कैमरे लगाए गए, एक्सपर्ट बुलाए गए, लेकिन भेड़िये पकड़ में नहीं आ सके। स्थिति पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर मांग की है कि आदमखोर भेड़िये को देखते ही मार गिराने की अनुमति दी जाए। आदेश मिलते ही ऑपरेशन शूट एट साइट चलाया जाएगा।
कैसरगंज के रेंजर ओंकार नाथ यादव ने बताया कि भेड़िये को पकड़ने के लिए हर संभव कोशिश की गई है। स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर हो रही है। इसीलिए विभाग ने सरकार को पत्र भेजकर मारने की अनुमति मांगी है।
32 टीमें तैनात, फिर भी नतीजा शून्य
भेड़ियों को पकड़ने के लिए डीएफओ बाराबंकी, गोंडा और श्रावस्ती को जिम्मेदारी दी गई है। वन विभाग की 32 टीमें, एसएसबी, स्थानीय पुलिस, पंचायत विभाग के कर्मचारी, रोजगार सेवक और सफाईकर्मी तक इस अभियान में लगाए गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई नतीजा नहीं निकला।