जिला अस्पताल में भर्ती एक मासूम को सुबह स्टाफ नर्स द्वारा इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। बच्चे ने कुछ देर में ही तड़पकर दम तोड़ दिया। इस पर परिवारीजन नाराज हो गए। उन्होंने जिला अस्पताल में हंगामा करने के बाद सामने स्थित बौद्ध परिपथ पर जाम लगा दिया।
शव सड़क पर रखकर स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप लगाया कि पैसे की मांग पूरी नहीं होने पर स्टाफ नर्स ने बच्चे को गलत इंजेक्शन लगाया जिससे उसकी जान चली गई। मौके पर पहुंची पुलिस से सीएमएस ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए। हंगामे के चलते दो घंटे तक मार्ग जाम रहा।
हरदी क्षेत्र में खम्हरिया शुक्ल गांव निवासी शिवदत्त के दस माह के पुत्र कृष्णा को रविवार को पेट दर्द और बुखार की शिकायत थी। परिवारीजन उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए बच्चे का इलाज शुरू किया।
शिवदत्त के मुताबिक सोमवार रात 12 बजे कृष्णा को इंजेक्शन लगाने के नाम पर स्टॉफ नर्स ने 500 रुपये मांगे। पैसे नहीं होने की बात कहने पर उसने इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया। मान मनौवल के बाद सुबह छह बजे इंजेक्शन लगाया। उसके आधे घंटे बाद बच्चे की तबियत बिगड़ गई। तेज झटके आने लगे।
परिवारीजनों ने डॉक्टरों को बताया। डॉक्टर के आने तक कृष्णा ने दम तोड़ दिया। इस पर परिवारीजन रोने-बिलखने लगे। कुछ ही देर में उनके परिचित व करीबी भी आ गए। नाराज परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने स्टाफ नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया।
जिला अस्पताल के सामने स्थित बौद्ध परिपथ पर शव रखकर जाम-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे यातायात सुबह सात बजे से नौ बजे तक आवागमन ठप रहा। सूचना पर कोतवाली प्रभारी जेएन शुक्ला मौके पर पहुंच गए लेकिन परिवारीजन आरोपी स्टॉफ नर्स पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस के फोन करने पर सीएमएस डॉ. ओपी पांडेय ने कमेटी गठित कर जांच कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद बच्चे के परिजन शांत हुए।