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नहाय खाय से शुरू हुआ छठ पर्व, खरना आज

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बहराइच के बेरिया मंदिर परिसर में तालाब के तट पर छठ पूजा के लिए तैयार वेदी। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। संतान की खुशहाली के लिए रखा जाने वाला छठ व्रत सोमवार को नहाय खाय से शुरू हुआ। घर की साफ-सफाई करने के बाद व्रती महिलाओं ने शाम को स्नान और पूजन-अर्चन करने के बाद कद्दू व चावल से बने प्रसाद को ग्रहण किया। मंगलवार को व्रती महिलाएं खरना करेंगी। इसके लिए बाजार भी सजकर तैयार हैं। चार दिवसीय महापर्व का समापन 10 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद होगा।
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दीपावली के छह दिन बाद छठ मइया की पूजा की जाती है। बिहार और पूर्वांचल में इस व्रत का विशेष महत्च है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, रोग मुक्ति, सुख और समृद्धि व संतान की रक्षा के लिए व्रत रखती हैं। सूर्य देव की उपासना का पर्व छठ पूजा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। शाम को महिलाओं ने छठ मइया के पारंपरिक गीत गाए। मंगलवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रतधारी महिलाएं दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करेंगी। इसे खरना कहा जाता है। आसपास के सभी लोगों को खरना का प्रसाद वितरित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। बुधवार को डूबते सूरज को अर्घ्य देकर छठ मइया का पूजन-अर्चन किया जाएगा। गुरुवार को उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद 36 घंटे तक व्रत रखने वाली महिलाएं पारण करेंगी।
वेदी हो रही तैयार
छठ मइया की पूजा करने के लिए घाटों पर वेदी तैयार की जा रही है। श्रद्धालु वेदी बनाने में जुटे हुए हैं। वेदी बनाने के बाद रंग-रोगन किया जाएगा। डूबते व उगते सूरज को अर्घ्य व्रती महिलाएं देेंगी। अर्घ्य देने से पहले बने वेदी पर पूजन-अर्चन करेंगी।
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बाजारों में छाई रौनक
दीपावली पर्व के बाद एक बार फिर से बाजार गुलजार हो गए है। महिलाएं खरीदारी करने के लिए बाजारों में उमड़ रही हैं। बाजार गुलजार होने से दुकानदारों के चेहरे पर रौनक बनी हुई है। दोपहर के बाद शुरू हुई खरीदारी का सिलसिला देर रात तक चलता है।
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