प्रवासी साइबेरियन पक्षियों ने मंझरा डैम को बनाया नया ठिकाना। - स्रोत : वन्यजीव प्रेमी
बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार की पहचान रही गेरुआ नदी इस बार प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से महरूम है। साइबेरिया से आए इन विदेशी मेहमानों ने इस वर्ष चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के दूसरी ओर स्थित मंझरा डैम को अपना नया ठिकाना बनाया है। ऐसे में कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटकों को यदि इन दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का दीदार करना है, तो उन्हें मंझरा डैम का रुख करना होगा, जहां ये पक्षी अठखेलियां करते देखे जा सकते हैं।
कतर्नियाघाट के बीच से बहने वाली गेरुआ नदी कभी साइबेरियन पक्षियों का मुख्य बसेरा हुआ करती थी। हालांकि, नदी में जमा गाद, ग्रामीणों की नावों के आवागमन और वन विभाग की बोट के संचालन के कारण बढ़ी मानवीय चहल-पहल से विचलित होकर इन पक्षियों ने ठिकाना बदल लिया है। अब गेरुआ नदी और महादेवा ताल के बजाय मंझरा डैम इन मेहमान पक्षियों के कलरव से गुलजार है।
सोमवार को कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब की पांच सदस्यीय टीम, अध्यक्ष बी.डी. लखमानी के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के सिलसिले में जंगल भ्रमण पर थी। टीम जब कतर्नियाघाट से निकलकर मंझरा डैम पहुंची, तो वहां का अद्भुत नजारा देख दंग रह गई। डैम में साइबेरिया से प्रवास पर आए लालसर और अबलक बत्तख के झुंड जलक्रीड़ा करते मिले। इस दुर्लभ दृश्य को क्लब के वन्यजीव फोटोग्राफर अमन लखमानी ने अपने कैमरे में कैद किया। इस दौरान टीम के सदस्य अंकुर राव, मोहम्मद आसिफ और सत्यम रावत भी इस मनोरम दृश्य के साक्षी बने।
प्रवासी पक्षियों को देखने से वंचित रह जाते हैं सैलानी
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष ने बताया कि पर्यटक बड़ी उम्मीदों के साथ सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर कतर्नियाघाट पहुंचते हैं, लेकिन प्रवासी पक्षियों के सही ठिकाने की जानकारी न होने के कारण वे इन विदेशी मेहमानों का दीदार नहीं कर पाते। इसका मुख्य कारण यह है कि कतर्नियाघाट की सामान्य सफारी और बोट (नौका) का रूट मंझरा डैम की तरफ नहीं है। उन्होंने पर्यटकों को सुझाव दिया कि जो सैलानी इन साइबेरियन पक्षियों को देखना चाहते हैं, वे बिछिया बाजार से कैलाशपुरी होते हुए मंझरा डैम पहुंच सकते हैं। यहां प्रवासी पक्षियों को देखकर वे अपनी यात्रा को यादगार बना सकते हैं।