अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए आई निशुल्क बोरिंग को करवाए बिना ही धन का भुगतान करा लिया गया। मामला 2008 का है। शिकायतों के बाद इसकी जांच समाज कल्याण अधिकारी विकास की ओर से की गई थी। जिसकी रिपोर्ट अगस्त 2016 में उच्चाधिकारियों को सौंपी गई थी। इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी विकास की तहरीर पर मामले में कोतवाली पुलिस ने एक जुलाई को सहायक विकास अधिकारी सहित तीन पर बीस लाख बीस हजार रुपये गबन का मामला दर्ज किया है।
शासन की ओर से अनुसूचित जाति के लिए वर्ष 2008 में निशुल्क बोरिंग आई थी। इसके बाद बोरिंग कराए बिना ही उसका भुगतान करा लिया गया। इस मामले में वर्ष 2015 में जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास रिंकू सिंह राही को जांच सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट 29 अगस्त 2016 को प्रस्तुत की गई। 408 पन्ने की जांच में बीस लाख बीस हजार के गबन का मामला सामने आया।
जांच में उल्लेख किया गया कि मटखनवा, भिखारीपुर मसढ़ी, ठेगरहना व चहलवा सहित कई गांव के लाभार्थियों को इस योजना के बारे में जानकारी ही नहीं है। न ही उनके खेतों में निशुल्क बोरिंग की गई है। यही नहीं शिवगढ़ा में रहने वाली महिला अनारा देवी पत्नी रंगीलाल के खेत में निशुल्क बोरिंग किया जाना दर्शाया गया है। जबकि इस नाम की कोई भी महिला गांव में मौजूद नहीं है।
ऐसे में जांच अधिकारी ने क्षेत्र में 400 बोरिंग कराए बगैर धन का गबन करने की रिपोर्ट तैयार की। इसके लिए कार्यदाई संस्था ग्रामोद्योग विकास संस्थान गोंडा के प्रबंधक सहित ग्राम विकास अधिकारी रऊफ खां व सहायक विकास अधिकारी दयाराम वर्मा के खिलाफ केस दर्ज कराने की संस्तुति की उच्चाधिकारियों से की थी। इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी विकास की तहरीर पर एक जुलाई 2017 को कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस संबंध में में प्रभारी निरीक्षक रामयतन वरुण ने बताया कि एडीओ समेत तीन के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच भंगहा चौकी प्रभारी को सौंपी गई है।