बहराइच। मेडिकल कॉलेज का महिला विंग इन दिनों बदहाली से जूझ रहा है। महज 100 बेड की क्षमता वाले इस विंग में इस समय 250 से अधिक मरीज भर्ती हैं। हाल यह है कि न तो वार्डों में जगह बची है और न ही प्राइवेट कमरों में। मजबूरी में महिलाएं बरामदों तक जमीन पर लेटकर इलाज करवा रही हैं।
मेडिकल कॉलेज की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शनिवार को 69 मरीज भर्ती हुए। ओपीडी में 300 से अधिक मरीजों की जांच की गई। प्रतिदिन औसतन 50 से 60 मरीज भर्ती होते हैं। इससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। बेड की कमी के चलते स्थिति यह है कि मरीज अपनी रिक्वेस्ट पर खुद को बरामदे में जमीन पर भर्ती करवा रहे हैं।
जनरल वार्ड ही नहीं, बल्कि प्राइवेट वार्ड भी खचाखच भरे हैं। अस्पताल परिसर में बैठने तक की जगह नहीं बची है। जनरल ओपीडी से पता चल रहा है कि ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में महिलाएं इलाज के लिए जिला मुख्यालय आ रही हैं। सामान्य बीमारियों के साथ गंभीर रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
तो इसलिए भी जल्दी नहीं खाली होते बेड
महिला विंग में ज्यादातर महिलाएं प्रसव से संबंधित आती हैं, सामान्य प्रसव के दौरान महिला को 24 घंटे से 48 घंटे तक भर्ती रखा जाता है। अगर डिलिवरी ऑपरेशन से होती है, तो उसे सात से 12 दिन तक भर्ती रखने की अनिवार्यता होती है। कभी-कभी मरीज की स्थिति को देखकर भी चिकित्सक निर्णय लेते हैं। इसके चलते बेड जल्दी नहीं खाली हो पा रहे।
रिक्त है एक चिकित्सक का पद
महिला विंग में चिकित्सकों के चार पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती केवल तीन की ही है। मरीजों का दबाव इतना अधिक है कि डॉक्टरों को चौबीसों घंटे खपना पड़ रहा है। नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल टीम पर भी अतिरिक्त भार बढ़ गया है।
प्राचार्य ने मानी समस्या, बोले- लिखा है पत्र
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. संजय खत्री ने स्वीकार किया कि 100 बेड के सापेक्ष महिला विंग में इस समय 145 मरीज भर्ती हैं। मरीजों की समस्या को देखते पांच बेड शनिवार को और बढ़ा दिए गए है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेड की क्षमता बढ़ाने और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।