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सात जिलों में नहरें मचा सकतीं तबाही

Sat, 08 Aug 2015 09:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच/नानपारा। नहर और माइनरों की कमजोर दीवारें इस बार फिर तबाही का कारण बन सकती हैं। पिछले साल आई भीषण बाढ़ से सबक लेकर नहरों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपये तो खर्च किए गए लेकिन हालत नहीं सुधरी।
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वहीं, नहरों की पुनर्स्थापना के लिए शासन से स्वीकृति मिलने के बाद भी काम नहीं शुरू हो सका है क्योंकि अफसरों तक बजट नहीं पहुंचा है।

ऐसे में अगर सरयू बैराज पर पानी खतरे के निशान से ऊपर हुआ तो नहरों के कमजोर किनारे कटेंगे। बहराइच से बस्ती तक सात जिलों में तबाही मचेगी। करीब नौ नौ लाख हेक्टेयर में फसलें बर्बाद होंगी और गांव के नामों निशान भी मिट सकते हैं। 

वर्ष 2014 की बाढ़ में नेपाल से अचानक पानी आने पर सरयू मुख्य नहर के साथ माइन नहरें क्षतिग्रस्त हो गईं थीं, जिससे बाढ़ की विभीषिका दोगुने से अधिक हो गई थी। बड़े पैमाने पर तबाही मची थी।
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इन क्षतिग्रस्त नहरों को बाढ़ खत्म होने के बाद 100 करोड़ रुपये खर्च कर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दुरुस्त कराया गया था। इसके बाद सरयू नहर खंड प्रथम में नहरों की पुनर्स्थापना के लिए 709.19 करोड़ का बजट तैयार कर फाइल शासन को भेजी थी।

इसके बाद केंद्रीय दैवीय आपदा की छह सदस्यीय टीम ने बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर और बस्ती क्षेत्र में नहरों का मुआयना किया था। नहरें काफी कमजोर मिली थीं, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी।

इसके बाद शासन ने नहरों की पुनर्स्थापना के लिए प्रस्तावित 709.19 करोड़ रुपये के बजट को हरी झंडी दे दी थी लेकिन डेढ़ माह बाद भी बजट आवंटित नहीं हुआ है।

सरयू नहर खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता देवेश कुमार शुक्ला ने बताया कि नहरें काफी कमजोर हैं और अगर सरयू नदी के गोपिया बैराज पर खतरे का निशान 133.5 मीटर पार हुआ तो नहरों पर दबाव बढ़ेगा।

यह नहरें देवीपाटन मंडल और बस्ती में पानी के दबाव से कटकर बाढ़ का सबब बन सकते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही मच सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक बजट नहीं मिलता, विभाग बेबस है।


यहां फसलों को होगा नुकसान
अधिशासी अभियंता ने बताया कि नहरों में पानी का दबाव बढ़ने पर बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, अंबेडकरनगर, सिद्धार्थनगर व गोरखपुर क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। सात जिलों से सरयू नहर गुजरती है। वहां पर नौ लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हो सकती है।

43 स्थान हैं संवेदनशील
अधिशासी अभियंता देवेश ने बताया कि वर्ष 2014 की बाढ़ से सभी मुख्य नहर और सरयू योजक नहर 100 से अधिक स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुई थी। 43 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जो काफी संवेदनशील हैं।
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