बिछिया (बहराइच)। नेपाल सीमा से सटे थारू बहुल गांव की माधुरी दीदी ने घर से बाहर निकल विकास की नई इबारत लिख दी। प्रधान के रूप में उनका कार्य अन्य समाज की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया। इसी के बाद पंचायती राज विभाग ने उन पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई है। इसे पूरे प्रदेश में दिखाया जाएगा।
थारू जनजाति के लोग कुछ शर्मीले स्वभाव के होते हैं। आमतौर पर वह अपने स्थापत्य व कला के प्रति समर्पित होते हैं। राजनीति के प्रति उनका रुझान आमतौर पर कम होता है। खासतौर से महिलाओं में, लेकिन कतर्नियाघाट जंगल के बीच व नेपाल सीमा से सटे इलाके में बसे फकीरपुर ग्राम पंचायत की प्रधान माधुरी पर यह लागू नहीं होता। उन्होंने न केवल घर की दहलीज पार कर प्रधान का चुनाव लड़ा, बल्कि क्षेत्र का विकास कर पूरे प्रदेश में मिसाल बनकर उभरी हैं।
माधुरी का चयन पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश के उन नौ सशक्त महिलाओं में किया, जिन्होंने अपने बल पर विकास की नई दिशा तय करने के साथ ही सामुदायिक रूप में लोगों को जागरूक करने में अपना योगदान दिया है। इन सभी महिलाओं को 18 मार्च को लखनऊ के अलीगंज में पंचायती राज विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बुलाया गया था। वहां उन्हें उनके योगदान के लिए प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया। उनका कार्य किसी प्रेरणा से कम नहीं है। इसलिए उन पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई गई व किताब भी लिखी गई है। इसे पूरे प्रदेश की महिलाओं को दिखाया जाएगा।
प्रधान माधुरी का कहना है कि उन्होंने विवाह नहीं किया। पूरे पंचायत को ही वह अपना परिवार मानती हैं। इसलिए उन्हें लोग प्रधान नहीं बल्कि माधुरी दीदी कहते हैं। हमारे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां सड़क, नाली, खड़ंजा से लेकर बाल विवाह, रोजगार जैसे मुद्दे समस्या के रूप में है। इन्हें धीरे-धीरे समाप्त करने का प्रयास जागरूकता के माध्यम से किया जा रहा है।