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संगठित नेटवर्क का खुलासा: 10 हजार में बॉर्डर पार, पांच साल में 3800 को अवैध तरीके से पार कराई नेपाल सीमा

Sat, 25 Jul 2026 07:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अतुल अवस्थी, बहराइच

सार

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि संदिग्धों से प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये लेकर उन्हें नेपाल से भारत में प्रवेश दिलाने और लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाने का सौदा किया जाता था।
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सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत-नेपाल सीमा पर अजनाला थाना हमला कांड के वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सीमा पार कराने वाले एक संगठित नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि संदिग्धों से प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये लेकर उन्हें नेपाल से भारत में प्रवेश दिलाने और लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाने का सौदा किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि स्थानीय नेटवर्क पिछले कई वर्षों से सक्रिय था। अब एजेंसियां इसके पूरे तंत्र, वित्तीय लेन-देन और अब तक सीमा पार कराए गए लोगों की पड़ताल में जुट गई हैं।

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भारत-नेपाल सीमा पर पंजाब के अजनाला थाना हमला कांड के वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह और अमेरिका के कैलीफोर्निया निवासी मनवीर सिंह ढिल्लों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हाथ मानव तस्करी और संदिग्धों की आवाजाही से जुड़े एक बड़े नेटवर्क के सुराग लगे हैं। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सीमा पार कराने वाले स्थानीय गिरोह ने प्रत्येक व्यक्ति से 10-10 हजार रुपये लेने की बात तय की थी, जबकि नेपाल से लखनऊ एयरपोर्ट तक इनोवा वाहन 15 हजार रुपये में बुक किया गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार स्थानीय आरोपी पिछले करीब पांच वर्षों से सीमा पार कराने के नेटवर्क में सक्रिय थे और अब तक 3,800 से अधिक लोगों को भारत-नेपाल सीमा पार करा चुके हैं। अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनमें कितने लोग वैध दस्तावेजों के साथ आए और कितनों की एंट्री संदिग्ध थी।
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पूछताछ में सामने आया कि विक्रमजीत सिंह, अमेरिकी नागरिक मनवीर सिंह ढिल्लों, उसकी पत्नी और बच्चे को नेपाल से लेकर भारतीय सीमा पार कराने तथा लखनऊ एयरपोर्ट तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले से की गई थी। इसी दौरान एसएसबी और रुपईडीहा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर सभी को पकड़ लिया। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि स्थानीय आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। वित्तीय लेन-देन, संपत्ति और पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

बातचीत में पहचानते थे, फिर तय करते थे रकम
पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि स्थानीय नेटवर्क पहले यात्रियों से बातचीत कर उनकी स्थिति और दस्तावेजों का अंदाजा लगाता था। इसके बाद सीमा पार कराने के लिए अलग-अलग रकम तय की जाती थी। एजेंसियां इस पूरे तौर-तरीके की पड़ताल कर रही हैं।

स्थानीय तीनों आरोपी इसी इलाके के निवासी
गिरफ्तार इनोवा चालक राहुल कुमार रुपईडीहा के केवलपुर गांव का निवासी है। जबकि उसके सहयोगी सुरेश कुमार पाठक और दिलीप महानंद पुरवा के रहने वाले हैं। तीनों से लगातार पूछताछ की जा रही है।

संपत्तियों की भी होगी जांच
जांच एजेंसियों को प्रारंभिक जानकारी मिली है कि पिछले कुछ वर्षों में तीनों स्थानीय आरोपियों ने जमीन, मकान और अन्य निवेश के माध्यम से उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित की है। पुलिस ने अब उनके आय के स्रोत और संपत्तियों की वैधता की भी जांच शशुारू कर दी है।

पंजाब पुलिस ने संभाली कार्रवाई
एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पंजाब पुलिस को अवगत करा दिया गया था। शुक्रवार सुबह पंजाब पुलिस की टीम रुपईडीहा पहुंच गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया में शामिल रही। ट्रांजिट रिमांड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विक्रमजीत सिंह को पंजाब ले जाने की कार्रवाई की जाएगी।

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