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मिथिलेश ने गौरैया संरक्षण को बनाया जीवन

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19 बीएचआर 24 - गौरैया दिवस पर विशेष- बलहा के भज्जापुरवा निवासी नि:शक्त मिथिलेश घोसले के साथ। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। पर्यावरण की संकेतक गौरैया आज विलुप्त होने की कगार पर है। उसके संरक्षण के लिए दिव्यांग मिथिलेश ने वीणा उठाया। मिथिलेश व उनके आसपास के आंगन में गौरैया चहचहा रही हैं। वहीं, मिथिलेश द्वारा घोसला बनाकर लोगों को नि:शुल्क वितरित किया जा रहा है। पौधरोपण करने के साथ गौरैया संरक्षण को ही अपना जीवन मानकर मिथिलेश चलने लगे हैं।
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आज विश्व गौरैया दिवस है। पर्यावरण संरक्षण में गौरैया पक्षी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इतना ही नहीं गौैरैया के दर्शन को भी लोग शुभ मानते हैं। लेकिन आज के समय में गौरैया विलुप्त प्राय पक्षी हो गई है। लेकिन जिले में कुछ लोग ऐसे हैं जो गौरैया के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। कुछ इसी तरह बलहा विकास खंड के ग्राम पंचायत गुलरा के मजरा भज्जापुरवा निवासी मिथिलेश जायसवाल पुत्र अच्छेलाल गौरैया को सहेजने के लिए अपना सबकुछ लगा रहे हैं।
मिथिलेश जन्म से ही दिव्यांग हैं, लेकिन कविता लिखने के साथ मिथिलेश पर्यावरण प्रेमी व गौरैया संरक्षण का काम भी कर रहे हैं। मिथिलेश ने बताया कि वह तीन वर्ष से लगातार घोंसले अपने घरों के आसपास लगा रहे हैं। जिसमें 30 से अधिक गौरैया के साथ अन्य प्रजाति के पक्षी विचरण कर रहे हैं। मिथिलेश ने कविता के माध्यम से बताया कि मेरी प्यारी सी गौरैया जब आंगन में आती है, चूं-चूं वह राग सुना कर दिल को खुश कर जाती है।
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शहर के मोहल्ला अकबरपुरा निवासी कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी भी गौरैया संरक्षण पर काम कर रहे हैं। गोष्ठी का आयोजन कर लोगों को इससे पर्यावरण को होने वाले लाभ के बारे में बता रहे हैं। वहीं शहर के सिविल लाइंस निवासी मुकेश जायसवाल भी अपने लॉन में काफी संख्या में गौरैया का घोंसला लगाए हुए हैं। जिसमें गौरैया निरंतर विचरण कर रही हैं।
पर्यावरण प्रेमी व गौरैया संरक्षक मिथिलेश ने बताया कि वह लगातार तीन वर्ष से घोंसलों का निर्माण करवा रहे हैं। इस पर लगभग 200 रुपये का खर्च आता है। मिथिलेश ने बताया कि 200 रुपये खर्च आने के बाद भी वह लोगों को मुफ्त में घोंसला वितरित कर रहे हैं, जिससे गौरैया का संरक्षण हो सके।
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