रिसिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रात में रुकमणि विवाह का मंचन हुआ। विवाह होते ही महिलाओं ने फूलों की वर्षा शुरू कर दी। इसके बाद कथावाचक ने कथा सुनाते हुए कहा कि दान में सबसे बड़ा दान कन्यादान होता है।
रिसिया के अग्रवाल अतिथि भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पूजन-अर्चन के बाद रुकमणि विवाह का आयोजन हुआ, जिसमें झांकी के माध्यम से रुकमणि विवाह का मंचन हुआ। रुकमणि का विवाह होते ही महिलाओं ने वर-वधू पर फूलों की बारिश शुरू कर दी।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने वस्त्र, बर्तन, रुपये चढ़ाए। वृंदावन से आए कथावाचक बिपिन बापू शास्त्री ने रुकमणि विवाह के मौके पर कहा कि दान में सबसे बड़ा दान कन्यादान होता है। इसका बहुत बड़ा महत्व है।
उन्होंने कहा कि विवाह के बाद कन्या एक घर छोड़ दूसरे घर को जाती है। बेटी जहां जन्म लेने के बाद मां के घर को संजोती है तो विवाह के बाद पति के घर को संवारती है। इस मौके पर सुदीश, पुरुषोत्तम, सरोज शर्मा, चेयरमैन राजेश निगम आदि मौजूद रहे।