चरदा। नेपाल सीमा से सटे चरदा क्षेत्र की चार लाख आबादी बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए तरस रहे हैं। यहां स्थित एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन औसतन 400 मरीज उपचार के लिए आते हैं लेकिन महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से तमाम मरीजों को निराश लौटना पड़ता है।
ग्रामीण राम बदन वर्मा तथा अब्दुल समद बताते हैं कि सीएचसी में महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं है। विशेष उपचार के लिए लोगों को लंबी दूरी तय कर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएचसी में सामान्य बीमारियों के साथ महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा रहती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होने से मरीजों को संबंधित बीमारी के लिए विशेषज्ञ परामर्श मिल सकेगा। ऐसे में रोगियों को जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
दवा और जांच सुविधाएं भी बढ़ाने की जरूरत
सीएचसी की पैथोलॉजी में भी जांच की सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जाती है। स्वास्थ्य जांच की जरूरी मशीनें भी नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ सीएचसी में दवाओं और जांच की सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं। इससे सीमावर्ती क्षेत्र के मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार का लाभ मिल सकेगा।
बारिश में जलभराव बनता है परेशानी
बारिश के दौरान सीएचसी परिसर में जलभराव से मरीजों और तीमारदारों को आवागमन में परेशानी होती है। नालियों की नियमित सफाई के साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की जरूरत है। परिसर में बेहतर साफ-सफाई भी मरीजों के लिए सुविधाजनक वातावरण तैयार कर सकती है।
दिन और रात में दो-दो डॉक्टरों की ड्यूटी
सीएचसी अधीक्षक डॉ. थानेदार ने बताया कि दिन में दो चिकित्सकों और रात में इमरजेंसी के लिए दो चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। अस्पताल में करीब 25 कर्मचारी कार्यरत हैं। जलभराव की समस्या के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। आवश्यक व्यवस्थाएं मजबूत होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।