शुक्रवार देर रात मिहींपुरवा कस्बे का सबसे व्यस्ततम रेलवे क्रॉसिंग चौराहा अचानक आग की लपटों से धधक उठा। ट्रांसफॉर्मर में हुए जोरदार धमाके के बाद उठीं चिंगारियों ने देखते ही देखते पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयावह थी कि 10 दुकानें, दो मकान, एक कार और एक बाइक जलकर राख हो गईं। सिलेंडर विस्फोट और ट्रांसफॉर्मरों में लगातार हो रहे धमाकों से रात भर पूरा कस्बा दहशत में रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात करीब दो बजे चौराहे पर लगे ट्रांसफॉर्मर से अचानक धुआं उठने लगा। कुछ ही मिनटों में तेज धमाके के साथ ट्रांसफॉर्मर फट गया। धमाके के बाद निकली आग की लपटें और चिंगारियां आसपास की दुकानों, बिजली के तारों और टीनशेडों पर गिरने लगीं। कुछ ही देर में पूरा चौराहा आग की लपटों से घिर गया।
लोग जब तक नींद से जागकर बाहर निकलते, तब तक आग कई दुकानें लपटों से घिर गईं। स्थानीय लोग बाल्टियों, पाइपों और टैंकरों से आग बुझाने में जुटे ही थे कि एक दुकान में रखा गैस सिलेंडर विस्फोट के साथ फट गया। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे पूरे कस्बे में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना पर पहुंची मोतीपुर पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। करीब तीन घंटे तक चले अभियान के बाद किसी तरह आग की लपटों को फैलने से रोका जा सका, लेकिन तब तक व्यापारियों की वर्षों की जमा-पूंजी राख में बदल चुकी थी।
अग्निकांड में रईश, शाहिद, लल्ला, राकेश कुमार, नरेंद्र, रिंकू, दीनबंधु, वीरेंद्र, लाड़ले, मनोज, शहजादे, संजय कुमार, आदित्य वर्मा और मुकेश कुमार समेत कई व्यापारियों की दुकानें जल गईं। राकेश कुमार की कार और नरेंद्र की बाइक भी पूरी तरह नष्ट हो गई। संजय का किराना स्टोर और गोदाम पूरी तरह जल गया, यहां लगभग 25 लाख के नुकसान का अनुमान है। वहीं प्रारंभिक आकलन में संपूर्ण नुकसान एक करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है।
आग की चपेट में आकर दो ट्रांसफॉर्मर, विद्युत केबल और तार भी पूरी तरह जल गए। इसके चलते पूरे कस्बे की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। शनिवार दिन भर लोग भीषण गर्मी के बीच बिजली और पानी के संकट से जूझते रहे। घरों में लगे समर्सिबल और मोटरें बंद होने से पेयजल संकट भी गहरा गया।