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बहराइच के कृषि मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

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बहराइच के कतर्नियाघाट क्षेत्र में किसानों द्वारा बोयी गई लौकी। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। कतर्नियाघाट के जंगलों में बसे वनवासियों और आदिवासी किसानों की ओर से नई पद्धति से शुरू किए गए कृषि के मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। देश के 50 मॉडलों में बहराइच का भी चयन किया गया है। उप राष्ट्रपति आज संस्कृति मंत्रालय की ओर से एकत्र किए गए मॉडलों की पत्रिका का विमोचन करेंगे।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग का जंगली इलाका काफी पिछड़ा हुआ है। यहां वन ग्रामीणों और थारू जनजाति के किसानों को रोजी-रोटी के लिए महानगरों का रुख करना पड़ता था, जिसे देखते हुए सामाजिक संस्था देहात की ओर से किसानों को कृषि आधारित आजीविका से जोड़ा गया।
क्षेत्र के करीब 2700 किसान परिवारों का जीवन बदलने के लिए प्रयोग के रूप में शुरू किए गए मॉडल को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल गई है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से देश के 50 मॉडलों को चयनित किया गया है, जिसमें बहराइच के मॉडल को भी शामिल किया गया है।
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देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि बहु स्तरीय खेती, पंक्तिबद्ध खेती, प्राकृतिक खाद उत्पादन, श्री विधि और मिश्रित खेती को अब पूरे देश में पहचान मिलने जा रही है। मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए दस्तावेज को पत्रिका के रूप में संकलित किया गया है, जिसका विमोचन उप राष्ट्रपति वैंकैया नायडू दिल्ली में बुधवार को करेंगे। इस पत्रिका को दि विजन आफ अन्योदया का नाम दिया गया है।
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