दिल्ली में कमाने गए पांच मजदूर बृहस्पतिवार की रात फूड पॉइजनिंग के शिकार हो गए। हालत खराब होने पर सभी मजदूर प्राइवेट गाड़ी बुक कराकर घर आ रहे थे। इसी बीच रास्ते बरेली व सीतापुर के बीच एक मजदूर की रात में मौत हो गई। जबकि चार मजदूरों को सीएचसी चर्दा में भर्ती कराया गया। इसमें तीन बेहोशी की हालत में थे। रात भर इलाज के बाद सभी मजदूरों के स्वस्थ होने पर शुक्रवार की सुबह डिस्चार्ज कर दिया। उधर मृतक के परिजनों ने उसकी अंतिम संस्कार कर दिया है।
रूपईडीहा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत मधनगरा निवासी गोकरन (40), जगत (18), कौशल (25), राम धीरज (30), सुरेश (19) दिल्ली के तराई काले खां में मेट्रो ब्रिज में काम करने गए थे। इसी दौरान बृहस्पतिवार की सुबह सभी लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। गोकरन की हालत ज्यादा बिगड़ने पर सभी लोगों ने बोलेरो गाड़ी बुक कराई और अपने गांव चल दिए। आते समय देर रात रास्ते में गोकरन की मौत हो गई। वाहन चालक ने चर्दा सीएचसी में सभी को भर्ती कराया। इसमें गोकरन को डॉ. अर्चित श्रीवास्तव ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। जबकि चार स्टाफ नर्स अजय विश्वकर्मा और आरती, फार्मासिस्ट आशुतोष वर्मा, वार्डब्वाॅय अमित राव ने सभी का उपचार शुरू किया। सूचना मिलने पर सभी के परिजन अस्पताल पहुंच गए। जिससे काफी देर तक अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा। उधर युवक की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। परिवारीजन रो-रोकर बेहाल हैं।
सप्लाई का पानी पीने से हुए थे बीमार
स्वस्थ होने के बाद मजदूरों ने बताया कि दिल्ली में वे लोग राशन खरीदकर खाना बनाकर खाते थे, लेकिन सप्लाई का पानी पीते थे। पानी ठीक न होने के कारण सभी लोग बीमार पड़ गए थे। हालत खराब होने पर बोलेरो गाड़ी बुक कराकर घर लौट रहे थे। तभी रास्ते में गोकरन की मौत हो गई। इसके अलावा अन्य प्रदेशों के मजदूर भी इसी तरह बीमार पड़ने से अपने-अपने घर चले गए हैं।
दो महीने पहले कमाने गए थे सभी मजदूर
स्वस्थ होने के बाद सभी मजदूरों ने बताया कि वे लोग मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। गांव में काम न मिलने के कारण सभी लोग दो महीने पहले दिल्ली कमाने गए थे। सभी लोग काले खां में मेट्रो ब्रिज निर्माण में मजदूरी करते थे।
फूड पॉइजनिंग के शिकार पांच लोग गंभीरावस्था में देर रात लाए गए थे। इसमें से एक अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई थी। शेष चार लोगों का इलाज करने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
- डॉ.अर्चित श्रीवास्तव, सीएचसी चर्दा