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रैपिड सर्वे शुरू, बदल जाएगा कई वार्डों का चेहरा

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बहराइच। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की गणना के लिए जिले की दो नगर पंचायतों और एक नगर पालिका का रैपिड सर्वे शुरू हो गया है। इस गणना के बाद कई वार्डों के चेहरे बदलना तय है। सदर में रैपिड सर्वे के लिए 68 प्रगणक नियुक्त हुए हैं। उपजिलाधिकारी रैपिड सर्वे के प्रभारी होंगे। नगर पंचायतों में 32-32 प्रगणकों ने रैपिड सर्वे शुरू किया है। आपत्तियों और अंतिम प्रकाशन की तिथि भी स्पष्ट कर दी गई है।
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नगर पालिका सदर, बहराइच का रैपिड सर्वे इसलिए किया जा रहा है क्योंकि विगत वर्ष यहां नये वार्ड बढ़ाए गये हैं। यहां पर सीमा विस्तार हुआ था इसलिए नगर पालिका, बहराइच का रैपिड सर्वे कराया जा रहा है। यह भी बता दें कि 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 195448 थी। बाद में वार्ड बढ़ाकर 9225 नये लोग जोड़े गये। इसके अलावा पयागपुर और कैसरगंज नगर पंचायतों का नवसृजन हुआ है इसलिए इन दोनों नगर पंचायतों में भी पिछड़ी जातियों का रैपिड सर्वे शुरू कराया गया है।
ईओ दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने बताया कि प्रगणक परिवार में सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम आदि पता करेंगे। जिन वार्डों में पिछड़ी जातियों की संख्या अधिक होगी उन्हें इन्हीं के लिए आरक्षित किया कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रैपिड सर्वे शुरू हो चुका है। सर्वे की अनंतिम तिथि 10 जुलाई निर्धारित की गई है। 12 जुलाई को निस्तारण और 14 जुलाई को अंतिम प्रकाशन होगा। 15 जुलाई को सूची निदेशालय भेज दी जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित तहसीलों के उपजिलाधिकारी रैपिड सर्वे के प्रभारी होंगे। तहसीलदार, खंड शिक्षाधिकारी और ईओ क्षेत्रीय प्रभारी अधिकारी के तौर पर मॉनिटरिंग करेंगे।
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रैपिड सर्वे का विरोध भी शुरू हो गया है। सपा और बसपा ने इस रैपिड सर्वे का विरोध किया है। सपा जिलाध्यक्ष रामहर्ष यादव ने कहा कि यह रैपिड सर्वे एक प्रकार से सरकार की सोची-समझी रणनीति है। सरकार और भाजपा संगठन अपने लोगों को प्रत्येक वार्ड में बैठाना चाहता है। हमें पूर्वानुमान भी है कि निष्पक्षता से ओबीसी का सर्वे भी नहीं होगा। बसपा के जिलाध्यक्ष अशोक गौतम ने कहा कि केवल ओबीसी ही क्यों जिस बिरादरी की संख्या वार्ड में अधिक हो उन्हीं को लड़ाया जाए। सवर्ण और एससी का भी रैपिड सर्वे होना चाहिए। जेपी मिश्रा ने बताया कि 2017 के चुनाव में ओबीसी की आबादी का पता लगाने के लिए रैपिड सर्वे कराया गया था। दोबारा इसे कराने का क्या औचित्य है।
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