महसी (बहराइच)। जिले में हजारों बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बेलहा-बेहरौली तटबंध का जीवन बढ़ने वाला है। इसके लिए शासन ने 15.9 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की है। बेलहा-बेहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 25 से लेकर 64 तक तटबंध का चौड़ीकरण व उच्चीकरण किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा सिंचाई विभाग ने खाका तैयार किया है। कार्य शुरू कराने के लिए दर्जनों कटान पीड़ितों को विभाग ने तटबंध खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया है।
1955 में नानपारा के बलहा से जरवल के बेहरौली तक 95.500 किलोमीटर में इस तटबंध का निर्माण हुआ था। उद्देश्य था कि घाघरा की भीषण बाढ़ से बाहरी गांवों को बचाया जा सके। कैसरगंज, महसी व नानपारा तहसील में फैले इस तटबंध से जरवलरोड, कैसरगंज, बौंडी, हरदी, खैरीघाट व नानपारा थाना क्षेत्र की सीमाएं लगती हैं। घाघरा का जलस्तर बढ़ने पर पानी छोड़ने के लिए इसमें 24 साइफन (पल्ले वाले पुल) हैं। बेहतर मरम्मत के अभाव में यह तटबंध बदहाल हो चुका है। जगह-जगह रैन कट व रैट होल हो गये हैं। सहायक अभियंता बीबी पाल ने बताया कि विभाग ने इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी लक्ष्मी नारायण ट्रेडर्स लखनऊ को दी है। एक माह के भीतर काम पूरा होने की उम्मीद है। तटबंध के उच्चीकरण व चौड़ीकरण से तटवर्ती गांवों के आर्थिक विकास को पंख लगेंगे। वहीं, लोगों को दुश्वारियों से निजात भी मिलेगी।
दो दशक पूर्व जब घाघरा नदी की भयावह लहरों ने कहर बरपाना शुरू किया था तो महसी तहसील के घूरदेवी, तारापुरवा, टुड़ौली, जोगापुरवा, रामघाट, सिलौटा, गोलागंज, कायमपुर, कपरवल, मुरौव्वा व मुंसारी समेत दर्जनों गांव तबाह हो गये थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में यह तटबंध कटान पीड़ितों के लिए वरदान साबित हुआ था। लोगों ने तटबंध पर तिरपाल व झोपड़ी बनाकर शरण ली थी। पुनर्वासित होने तक लोगों ने यहीं जिंदगी बसर की। तीन महीने बाढ़ यही तटबंध पीड़ितों के लिए पनाहगाह साबित होता है।