तेजवापुर(बहराइच)। बहराइच-सीतापुर मार्ग पर घाघरा नदी पर बने चहलारी घाट पुल पर जगह-जगह गड्ढे हो गये थे। सरिया तक दिखने लगी थी। इसके चलते पुल से गुजरने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। साथ ही बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई थी। राहगीरों को हो रही समस्या पर अमर उजाला के एक जून के अंक में ‘प्रदेश का सबसे लंबा पुल जर्जर, दिखने लगीं अस्थियां’ शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया गया था। इसके बाद विभाग की ओर से चहलारी घाट पुल पर पैचिंग का कार्य करवा दिया गया। हालांकि, यह पैचिंग खानापूर्ति अधिक लग रही है। दरअसल, पैचिंग में समतलीकरण का ध्यान नहीं रखा गया है। इस वजह से वाहन हिचकोले खाते हुए गुजर रहे हैं।
बहराइच-सीतापुर मार्ग पर बने प्रदेश के सबसे लंबे चहलारी घाट पुल के निर्माण से सीतापुर जनपद की दूरी लगभग 70 किलोमीटर कम हो गई है। इस पुल से प्रतिदिन गोरखपुर, अंबेडकर, अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, सिदार्थ नगर, श्रावस्ती आदि जनपदों के हजारों वाहन गुजरते हैं और दिल्ली तक का सफर तय करते हैं। बीते दिनों इस पुल पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गये थे जिसके चलते वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गड्ढों के चलते तेज रफ्तार वाहनों के अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका भी थी। इसे लेकर अमर उजाला में प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की गई थी।
खबर का संज्ञान लेकर विभाग की ओर से गड्ढों की पैचिंग का कार्य करवा दिया गया है। हालांकि, पैचिंग कार्य में समतलीकरण का ध्यान नहीं रखा गया है। इसके चलते पुल पर जंपिंग की समस्या हो गई है। यही नहीं वाहनों के गुजरने से पुल पर बने गड्ढों की जो सरिया टूट गई थी उसे भी दोबारा नहीं डाला गया है। सीधे कोलतार व गिट्टी डालकर पैचिंग कार्य कर दिया गया है। इसके चलते वाहन हिचकोले खाते हुए निकल रहे हैं।