फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सपने दिखाकर नेपाली किशोरियों को फंसा रहे तस्कर

विज्ञापन
विज्ञापन
रुपईडीहा (बहराइच)। पड़ोसी देश नेपाल से भारत में मानव तस्करी जोरों पर है। नेपाल के सुदूर अंचलों से भारत में नौकरी दिलाने अथवा अच्छे परिवार में शादी कराने का झांसा देकर मानव तस्कर नेपाली किशोरियों की तस्करी कर रहे हैं। नेपाल से बहला-फुसलाकर लाई गईं इन किशोरियों को दिल्ली, शिमला व मुंबई समेत अन्य महानगरों में बेच दिया जाता है। कुछ किशोरियों को तस्कर अच्छे दाम मिलने पर खाड़ी देशों में भी भेज देते हैं। बीते एक वर्ष में 526 लापता किशोरियों में से 213 किशोरियों को रेस्क्यू कर उनके अभिभावकों के सुपुर्द किया जा चुका है। इनमें से दस किशोरियां खाड़ी देशों से भी रेस्क्यू की गई हैं। यह यारी जानकारी नेपाली गैर सरकारी संगठन माइती नेपाल ने दी है जो कि नेपाल सरकार के सहयोग से मानव तस्करी रोकने में सहयोग करती है।
विज्ञापन

नेपाल के ग्रामीण क्षेत्र विशेष रूप से पहाड़ों पर बसे कस्बों में लोगों को रोजी-रोटी के लिए जूझना पड़ता है। उद्योग-धंधों का अभाव व नौकरी के अवसर न होने से नेपाली पुरुष भारतीय महानगरों का रुख करते हैं। आर्थिक तंगी से बेहाल व अच्छे जीवनयापन की चाह में नेपाली किशोरियां तस्करों के हत्थे चढ़ रही हैं। मानव तस्करी में संलिप्त तस्कर भी गरीब नेपाली किशोरियों को भारतीय महानगरों में नौकरी दिलाने या शादी कराने का झांसा देकर मुंबई, दिल्ली, कोलकाता व बंगाल समेत अन्य महानगरों में ले जाकर बेच देते हैं जहां इन्हें देह व्यापार के धंधे में उतार दिया जाता है। अच्छे पैसों के लालच में नेपाली किशोरियों को तस्कर खाड़ी देशों में भी भेज देते हैं। नेपाल से भारतीय क्षेत्र में मानव तस्करी पर अंकुश लगाने पर कार्य कर रही नेपाली संस्था माइती नेपाल ने बीते एक वर्ष में भारत-नेपाल सीमा स्थित चेकपोस्ट से 499 नेपाली किशोरियों को पकड़कर उनके अभिभावकों के सुपुर्द किया है। संस्था ने दस किशोरियों को भारतीय महानगरों व खाड़ी देशों से रेस्क्यू कर उनके घर पहुंचाया है।
माइती नेपाल संस्था के संयोजक केशव कोइराला ने बताया कि बीते एक वर्ष में 526 नेपाली किशोरियां अपने घरों से लापता हुई हैं। उनके अभिभावकों की ओर से किशोरियों की खोजबीन के लिए प्रार्थना पत्र दिए गए थे। भारतीय सुरक्षा बलों व गैर सरकारी संगठनों की मदद से 213 किशोरियों की खोज कर उन्हें अभिभावकों के सुपुर्द किया गया है।
विज्ञापन

मानव तस्कर फेसबुक, व्हाट्सएप समेत विभिन्न सोशल साइट्स का प्रयोग कर नेपाली किशोरियों को अपने जाल में फंसाकर दोस्ती करते हैं। उसके बाद आरामदायक जीवनशैली व अनेक सुख सुविधाएं दिलाने के नाम पर इन्हें भारतीय क्षेत्र में बुलाकर महानगरों में पहुंचा देते हैं।
नेपाली संस्था माइती भारत-नेपाल सीमा स्थित क्षेत्र, विभिन्न विद्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर जागरुकता अभियान चला रही है ताकि मानव तस्करी पर अंकुश लगाया जा सके। भविष्य में इस संबंध में और भी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें