बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग एक नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। ऐसे में इस बार पर्यटकों को नए अंदाज का सामना करना पड़ेगा। थारू संस्कृति के साथ उनके पसंदीदा भोजन का स्वाद पर्यटक पा सकेंगे। इसके अलावा थारू हट और विश्राम गृह को नये रूप में आकार दिया जा रहा है। पर्यटकों के लिए वन निगम की ओर से बुकिंग शुरू कर दी गई है।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र सात वन रेंजों में विभक्त है। जंगल में कतर्नियाघाट के अलावा सुजौली, मुर्तिहा, मोतीपुर, ककरहा, निशानगाड़ा और धर्मापुर रेंज शामिल हैं। जंगल क्षेत्र में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ के साथ अन्य जंगली जीव विचरण करते हैं। इसके अलावा गंगेय डॉल्फिन, कछुआ, मरगमच्छ, घड़ियाल समेत अन्य जलीय जीव काफी मात्रा में संरक्षित वन क्षेत्र से बहने वाली नदियों में रहते हैं। जंगली और जलीय जीव पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। जंगल खुलने के लिए पर्यटक भी इंतजार करते हैं।
गौरतलब हो कि पर्यटकों का इंतजार एक नवंबर से खत्म हो रहा है। इसका मुख्य कारण मानसून सत्र का समापन होना है। साथ ही कोरोना संक्रमण भी काफी कम हो गया है।
प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप बधावन ने बताया कि एक नवंबर से सेंक्चुरी क्षेत्र पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है। इसके लिए पर्यटकों ने बुकिंग शुरू करा दी है। उन्होंने बताया कि वन निगम की साइड पर जाकर पर्यटक बुकिंग करा रहे हैं। डीएफओ ने बताया कि इस बार जंगल में 15 वर्ष पुराने वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा जो नियम बनाए गए हैं, उसका पालन पर्यटकों से कराया जाएगा। डीएफओ ने बताया कि जंगल भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों को थारू संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा। जिससे वह परेशान न हो सकें। इसके अलावा थारू समुदाय दिनचर्या में जिस भोजन का प्रयोग करते हैं, उसका सेवन भी पर्यटकों को कराया जाएगा।
कोरोना संक्रमण से पूर्व कतर्नियाघाट सेंचुरी 15 नवंबर से खुलता था, लेकिन संक्रमण के चलते बंदी और शासन के निर्देश पर दूसरी बार एक नवंबर से कतर्निया जंगल पर्यटकों के भ्रमण के लिए खोला जा रहा है। जंगल में पर्यटकों को वन्यजीवों को देखने के साथ भ्रमण समेत अन्य सुविधाएं मिलेंगी।
कतर्नियाघाट जंगल में पर्यटकों को भ्रमण कराने के लिए इस बार 25 जिप्सी वाहनों का पंजीकरण कराया जाएगा। डीएफओ ने बताया कि इस बार किसी भी वनकर्मी या वनाधिकारी का वाहन रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा।
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण अभी कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में पर्यटन पर आने वाले लोगों को बिना मास्क के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही इनकी संख्या दो से पांच के बीच ही होनी चाहिए।
कतर्नियाघाट सेंचुरी क्षेत्र के आसपास गांवों में थारू समुदाय के लोग काफी संख्या में निवास करते हैं। पर्यटकों का पूरा समय कट जाए, इसके लिए ग्राम प्रधान फकीरपुरी माधुरी से वार्ता की गई है। ग्राम प्रधान के संयोजन में पर्यटकों को थारू संस्कृति के साथ भोजन भी पर्यटकों को मिल सकेगा।