बहराइच। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र 15 जून से पर्यटकों के लिए पूरी तरह से बंद हो जाएगा। मानसून सत्र को लेकर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कतर्नियाघाट पर्यटन के लिए बंद हो जाएगा। इस समय अनलॉक के बावजूद कतर्नियाघाट में पर्यटकों की इंट्री नहीं है। ऐसे में अब पांच माह बाद ही सेंक्चुरी क्षेत्र पर्यटकों के भ्रमण के लिए खोला जाएगा। फिलहाल दो माह से कतर्नियाघाट में पर्यटकों की इंट्री अभी बंद चल रही है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 550 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। संरक्षित वन क्षेत्र कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा, सुजौली, मुर्तिहा, धर्मापुर, मोतीपुर और ककरहा रेंज में विभक्त है। जंगल में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ, बारहसिंघा, चीतल विचरण करते हैं। इसके अलावा जंगल के बीच से गुजरने वाली नदी में डॉल्फिन, कछुआ, मगरमच्छ और घड़ियाल भी रहते हैं। कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप बाधवान ने बताया कि इस समय सरकार की ओर से अनलॉक लगाया गया है। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र में पर्यटकों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक है।
डीएफओ ने बताया कि 15 जून से जंगल में मानसून सत्र लग जाएगा। ऐसे में 15 जून से लेकर 14 नवंबर तक जंगल बंद रहेगा। इस दौरान जंगल में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 14 नवंबर तक मानसून सत्र के चलते जंगल बंद होने से पर्यटकों की इंट्री 15 नवंबर के बाद ही हो सकती है। ऐसे में वन्यजीव प्रेमी पांच माह तक जंगल में वन्यजीवों का दीदार नहीं कर सकेंगे। डीएफओ ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते मार्च माह से वैसे ही जंगल में प्रवेश पर रोक लगी थी। ऐसे में अब नए सत्र में ही पर्यटक जंगल का भ्रमण कर सकेंगे।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए जंगल अप्रैल माह में बंद कर दिया गया था। ऐसे में अभी जंगल खुलने कासमय आठ दिन बाकी है। लेकिन संक्रमण के चलते जंगल पर्यटकों के लिए नहीं खुल सकता है। ऐसे में 15 जून से 14 नवंबर तक जंगल मानसून सत्र के चलते बंद रहेगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अब आठ माह बाद ही जंगल में पर्यटकों को प्रवेश मिल सकेगा।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ है। लखीमपुर जिले के धौरहरा रेंज से भी जंगल सटा हुआ है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान वन विभाग, एसएसबी जवान और एसटीपीएफ के जवान सघन गश्त करेंगे। जिसकी अगुवाई वह स्वयं करेंगे। जिससे मानसून सत्र के दौरान शिकारी जंगल में न प्रवेश कर सकें। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
- आकाशदीप बाधवान, डीएफओ, कतर्नियाघाट