कौड़ियाला नदी में डूब रहे बच्चों को बचाते हाथी
- फोटो : अमर उजाला
बहाव कम होने के बाद हाथियों का कुनबा बैराज के आसपास पहुंच गया। यहां मौजूद लोगों की भीड़ के कारण भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई थी। वन विभाग की टीम ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए हाथियों को सुरक्षित दिशा में मोड़ने के लिए हांका लगाया। लगातार निगरानी और नियंत्रित हांके के बाद हाथियों ने बैराज के गेट की तरफ जाने के बजाय किनारे का रास्ता पकड़ा और नदी से बाहर निकलकर सघन वन क्षेत्र की ओर बढ़ गए।
कुछ देर तक वन विभाग की टीम हाथियों के पीछे निगरानी करती रही। जब पांचों हाथी सुरक्षित रूप से जंगल में प्रवेश कर गए, तब अधिकारियों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन विभाग की टीम अब हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है।
नेपाल से आए होने की आशंका
वन विभाग के अनुसार यह इलाका हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्र और हाथी कॉरिडोर से जुड़ा है। सीमा पार नेपाल के जंगलों से भी हाथियों का इस क्षेत्र में आवागमन होता रहता है। मंगलवार को पांच हाथियों का यह कुनबा गेरुआ-कौड़ियाला नदी क्षेत्र में तेज बहाव की चपेट में आने के बाद बहते हुए बैराज की तरफ पहुंच गया। वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
भीड़ बढ़ती तो और मुश्किल हो सकती थी
हाथियों को देखने के लिए बैराज पर कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोग जुट गए। वन विभाग के लिए हाथियों को सुरक्षित निकालने के साथ भीड़ को नियंत्रित करना भी चुनौती बन गया। हाथी घबराकर यदि भीड़ की ओर बढ़ते तो बड़ा हादसा हो सकता था। वन कर्मियों ने लोगों को दूर रहने की हिदायत दी और हाथियों को सुरक्षित रास्ता देने का प्रयास किया।
डूब रहे बच्चों को बचाते हाथी
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वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि पांचों हाथी पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह क्षेत्र हाथी कॉरिडोर से लगा होने के कारण यहां हाथियों का मूवमेंट अक्सर होता रहता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि जंगल अथवा गांव के आसपास हाथी दिखाई देने पर उसके करीब न जाएं, भीड़ न लगाएं और उसे घेरने या छेड़ने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि हाथियों को सुरक्षित दिशा में भेजा जा सके।
वन विभाग और सिंचाई विभाग के बीच समय पर हुए समन्वय से मंगलवार को एक बड़ा हादसा टल गया। यदि बैराज के फाटक समय पर नीचे नहीं कराए जाते और पानी का तेज बहाव कम नहीं होता तो शावकों समेत पूरे कुनबे की जान खतरे में पड़ सकती थी। त्वरित कार्रवाई के बाद पांचों हाथियों का सुरक्षित जंगल लौटना वन विभाग और सिंचाई विभाग के लिए बड़ी राहत है।