बच्ची मिलने के बाद जुटे ग्रामीण
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बेटियों के प्रति संवेदनहीनता खत्म नहीं हो रही है। चाहे समाज का डर हो या परिवार का, लेकिन एक बार फिर जन्म लेते ही बच्ची को मां ने कूड़े के ढेर पर फेंक दिया। नवजात की चीख सुनकर लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन जब तक बच्ची की सुरक्षा का इंतजाम होता, तब तक उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेज दिया है।
बेटे और बेटियों को समाज में बराबरी का दर्जा देने की बात कही जा रही है, लेकिन बेटियों के प्रति संवेदनहीनता खत्म नहीं हो रही है। भले ही बेटियां बेटों से एक कदम आगे हैं, लेकिन रूढ़वादिता बेटियों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
कभी लोक लाज का डर तो कभी परिवार की चिंता के चलते मां जन्म लेते ही अपने जिगर के टुकड़े को कूड़े के ढेर पर फेंक रही हैं। बुधवार सुबह करीब 11 बजे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पयागपुर से 100 मीटर की दूरी पर बस अड्डा बाजार मार्ग के किनारे एक नवजात की चीख आसपास के लोगों ने सुनी। लोग मौके पर पहुंचे तो नवजात को कूड़े के ढेर पर देखकर सन्न रह गए।
तत्काल 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी गई। गश्ती टीम के न पहुंचने पर पयागपुर थाने को अवगत कराया गया। लेकिन जब तक पुलिस पहुंचती, तब तक नवजात ने दम तोड़ दिया। थानाध्यक्ष एके यादव का कहना है कि बालिका मृत हालत में मिली थी। वह किस परिवार की है, पुष्टि नहीं हो सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।
उधर, जन्म लेते ही बेटियों को फेंकने की घटनाओं में बीते डेढ़ माह में बढ़ोतरी हुई है। शहर में चार स्थानों पर पखवारे भर पूर्व नवजात बालिकाओं के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले थे। वहीं मिहींपुरवा में भी नवजात का शव मिल चुका है। पयागपुर में भी 20 दिन पूर्व बस अड्डा बाजार के निकट नवजात बालिका का शव बरामद हुआ था।