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Bahraich News: भेड़ियों और तेंदुओं के हमलों से बहराइच के तराई क्षेत्र में दहशत

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मंझारा तौकली में वन्यजीव के हमले के बाद मचान बनाकर बैठे ग्रामीण। - फोटो : मंझारा तौकली में वन्यजीव के हमले के बाद मचान बनाकर बैठे ग्रामीण।
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बहराइच। तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। जिले के कैसरगंज, मिहींपुरवा और महसी क्षेत्र में भेड़िया और तेंदुए लगातार हमले कर रहे हैं, वन विभाग की टीमें मौके पर केवल औपचारिकता निभा रही हैं। ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
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कैसरगंज क्षेत्र के मंझारा तौकली व आसपास के गांवों में भेड़िये का उत्पात फिर से शुरू हो गया है। सितंबर से अब तक भेड़िये के हमलों में आठ लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक बुजुर्ग दंपती भी शामिल हैं। यह पूरा इलाका सरयू नदी के कछार में आता है, जहां गन्ने की घनी खेती होने के कारण भेड़िये आसानी से खेतों में छिप जाते हैं और घटनाओं के बाद उनका पता नहीं चल पाता।

उधर, महसी तहसील के गंगापुर, परसोहना और रेहुआ मंसूर गांवों में पिछले चार दिनों से तेंदुआ लगातार दिख रहा है। गंगापुर और परसोहना गांव में तेंदुआ दो बच्चों पर हमला कर उन्हें घायल भी कर चुका है। ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं।
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वन्यजीवों की दहशत से मिहींपुरवा क्षेत्र भी घिरा हुआ है। ककरहा और मुर्तिहा रेंज में बाघ और तेंदुओं का आतंक जारी है। बृहस्पतिवार को ककरहा रेंज के लोधनपुरवा गांव में खेत देखने गए किसान भीखन पर तेंदुए ने हमला कर उनकी जान ले ली। इस हमले के 24 घंटे के भीतर शुक्रवार को लोधनपुरवा से करीब दो किलोमीटर दूर खल्ला पुरैना, अमृतपुर गांव में खेत में काम कर रहे हरिश्चंद्र पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। (संवाद)
गन्ने के खेत बन रहे अस्थायी आश्रय स्थल
बहराइच वन प्रभाग के डीएफओ रामसिंह यादव का कहना है कि ज्यादातर घटनाएं उन इलाकों में हो रही हैं जहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर है। गन्ने के घने खेत हिंसक वन्यजीवों को जंगल जैसा वातावरण प्रदान करते हैं, इस कारण भेड़िये, बाघ और तेंदुए इन्हीं खेतों में शरण ले रहे हैं। भोजन की तलाश में ये जानवर गांवों और खेतों की ओर बढ़ रहे हैं और आम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग पर सवाल
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण दहशत में हैं। लोधनपुरवा निवासी जनकराज का कहना है कि वन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। हमलों के बाद सिर्फ औपचारिक कॉबिंग और ड्रोन निगरानी की जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा के प्रभावी उपाय नहीं दिखते। रामसुंदर ने कहा कि प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए, वन्यजीवों की मूवमेंट की नियमित मॉनिटरिंग हो और गन्ने की कटाई के समय चीनी मिलों से किसानों को प्राथमिकता पर पर्ची उपलब्ध कराई जाए, ताकि खेत साफ होने पर वन्यजीवों को छिपने का मौका न मिले।
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ग्रामीणों के लिए सुरक्षा संबंधी सुझाव-
- गन्ने के खेतों और कछारी इलाकों में अकेले न जाएं, समूह में जाएं।
- सुबह और शाम को अधिक सक्रिय होते हैं वन्यजीव खेत जाने से बचें।
- गांव और खेतों के आसपास झाड़ियों की नियमित साफ-सफाई रखें।
- खेतों में काम करते समय महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें।
- गांव की निगरानी के लिए मचान, टावर या ऊंचे प्लेटफॉर्म बनाएं।
- पालतू पशुओं को शाम होने से पहले सुरक्षित स्थान पर बांधें।
- वन्यजीव की आवाज, पगचिह्न या मूवमेंट दिखे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
- मोबाइल में वन विभाग, पुलिस और स्थानीय चौकी का नंबर सेव रखें, तुरंत संपर्क करें।
- गन्ने के खेतों की कटाई के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतें।
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