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तीन तलाक ने भारतीय महिलाओं को हक के लिए लड़ना सिखाया

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बहराइच। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बहराइच की ही एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक बेटी को उसके पति ने स्टेशन पर तीन तलाक दे दिया और बेटी के पिता को फोन कर उसे वहां से ले जाने के लिए कहा। इसके बाद उनके तमाम प्रयासों के बाद वह लड़का दोबारा शादी को तो तैयार था, लेकिन उसका कहना था कि पहले लड़की किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शादी करे और वह व्यक्ति उसे तलाक दे तब ही कुछ हो सकता है। बेटी ने इससे साफ इंकार कर दिया। इस पर उन्होंने बेटी से कहा कि सुप्रीमकोर्ट का फैसला है, तुमसे कोई हक नहीं छीन सकता। राज्यपाल ने बताया, सितंबर, 2017 में हुई इस घटना ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था और मैंने भावुक होकर प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखा था।
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इसमें लिखा कि 1986 में संसद में कानून बनाकर शाहबानो मामले में जो गलती हुई थी उसे सुधारने का अब वक्त आ चुका है। अब सुप्रीमकोर्ट का फैसला भी ह्रै जिस पर आसानी से संसद में कानून बना सकते हैं। बकौल आरिफ मोहम्मद, अगले ही दिन मोदी जी ने उन्हें दिल्ली बुलाया और कानून मंत्रालय के विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर तीन तलाक पर कानून का प्रारूप तैयार करने को कहा। शीघ्र ही संसद से एक अधिकारी का फोन आया और उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि प्रयास सफल हो गया है। तीन तलाक पर विधेयक इसी सत्र में आएगा। तीन तलाक पर बने इस कानून ने न सिर्फ मुस्लिम महिलाओं बल्कि सभी महिलाओं को हक के लिए लड़ना सिखाया।
राज्यपाल ने कहा कि पुरुषों की शक्ति महिलाओं से ही है। गीत गोविंद में भी उदाहरण मिलता है कि वृंदावन में जब श्रीकृष्ण (जिन्हें संपूर्ण पुरुष माना गया है) शाम होने पर डर महसूस करते हैं तो नंद बाबा राधा को यह जिम्मेदारी सौंपते हैं कि वह उन्हें लेकर जाएं ताकि श्रीकृष्ण को डर न लगे। हमारे यहां अर्द्ध नारी
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चर की कल्पना की गई है। सभी संस्कृतियों में इसका जिक्र मिलता है। माना जाता है कि शिवजी को भी शक्ति सती से ही मिलती है, इसलिए शक्ति स्वरूपा को उसका सम्मान दिलाना सभी का कर्त्तव्य है।
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