बहराइच। शक्ति की प्रतिरूप नारी को अपनी क्षमता का अहसास हो तो वह सफलता के प्रतिमान गढ़ सकती है। जिन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी के साथ घर की मर्यादा बनाए रखी और अपनी जीवटता, मेहनत व आत्मविश्वास से सपनों को साकार करने के लिए अलग पहचान बनाई है। ऐसी महिलाओं का आत्मविश्वास व हौसला बढ़ाने के लिए अमर उजाला ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला पीजी कॉलेज में अपराजिता कार्यक्रम आयोजित किया। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के हाथों ऐसी महिलाओं को सम्मान दिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया। अमर उजाला ने उनके संघर्ष की कहानी उन्हीं की जुबानी जानी।
कितनों की तकदीर बदलनी है तुम्हें, कितनों को रास्ते पर लाना है तुम्हें। अपने हाथ की लकीरों को मत देखों, इन लकीरों से आगे जाना है तुम्हें। ये चंद पंक्तियां शहर की बलमीत कौर पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं। 28 सालों से जीवन का सुख त्यागकर मूक-बधिर बच्चों को जीवन की नई दिशा देने में जुटी हुई हैं। बच्चों के जीवन में कोई कष्ट न आएं, इसके लिए बलमीत ने शादी न करने का फैसला लिया। 28 सालों के कठिन परिश्रम से अब बलमीत अपना नाम जिले में रोशन कर चुकी हैं। अब भी वह 70 दिव्यांग बच्चों को सेवा दे रही हैं।
लॉकडाउन के भयावह अंधेरे में गरीब परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी झोपड़ियों में ज्योति जलाने का काम कर शहर के छावनी बाजार निवासी ज्योति बंसल ने अपनी अलग पहचान बनाई। वैसे तो वह रोटरी क्लब से जुड़कर पहले से ही समाजसेवा करती आ रही हैं, लेकिन लॉकडाउन के भयावर्ह काल में भी अपने दो बच्चों को घर पर छोड़कर बाहर से आए लोगों की झोपड़ी में पहुंचकर खाना व आर्थिक मदद कर अमिट छाप छोड़ी। ज्योति ने शहर के कई बच्चों को आर्थिक मदद देकर उनकी रुकी पढ़ाई को भी पूरा कराने का काम किया है।
स्त्रियों के लिए काम करने वाली शहर केे शिवनगर निवासी अंशिका मित्तल ने जिले में लहंगा बैंक की स्थापना की। विवाह योग्य कन्याओं के अरमान अधूरे न रहें, इसके लिए अंशिका शुरू से सेवा भाव में तत्पर रहीं। कोरोना काल के दौरान भी अंशिका ने रात के दो बजे ढाई सौ लोगों का खाना बनाकर अपना एक अलग कीर्तिमान जिले में स्थापित किया। अंशिका ने जिला अस्पताल में भी कई बार रक्तदान कर लोगों की जान बचाने का काम भी किया है। वह जिले में संचालित अन्नरथ के लिए पूरा योगदान दे रही हैं। अब शहर में समाजसेवा के लिए इनकी अलग पहचान बन चुकी है।
बुलंदशहर की रहने वाली डॉ. अंजलि अग्रवाल ने चुनौती को स्वीकार कर जिम्मेदारी निभाने का बीड़ा उठाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। बहुत ही कम समय में प्राचार्या का पद संभालते हुए महिला पीजी कॉलेज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है। प्राचार्या के अंदर कई और भी हुनर हैं। उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश में कविता से एक अलग पहचान कायम की हुई है। यही नहीं उन्होंने अपने कंधे पर व्यापार मंडल की उपाध्यक्ष केे पद की जिम्मेदारी लेकर बड़ा काम किया है। पश्चिम यूपी से लेकर पूर्वांचल तक चुनौतियां व जिम्मेदारियों को संभालते हुए एक नया मुकाम हासिल किया है।