बहराइच। मन में आत्मविश्वास हो, तो सबका भरोसा जीता जा सकता है। सामने पत्थर ही क्यों न हो, तोड़कर मंजिलें भी प्राप्त की जा सकती हैं। मन मेें कुछ ऐसी भावना के साथ मिहींपुरवा तहसील के थारू गांव में गठित बाल संसद के पदाधिकारियों ने अमेरिका से आए छात्र-छात्राओं के दल से बेहिचक सवाल जवाब किए। थारू बच्चों के सवालों को सुनकर अमेरिकी दल ने चुप्पी साध ली। अमेरिकी दल ने बच्चों के जज्बे को सलाम करते हुए हुनर को सीखा और उनकी पोशाक पहनकर बिताए जा रहे जीवन को महसूस किया। भ्रमण के बाद गेरुआ नदी में सैर-सपाटा कर दल वापस अमेरिका चला गया।
डेवलपमेंटल एसोसिएशन फॉर हूमन एडवांसमेंट देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी के नेतृत्व में अमेरिका से 22 छात्र-छात्राओं का दल बहराइच पहुंचा। मुख्य कार्यकारी ने बताया कि अमेरिकी दल ने मिहीपुरवा के लोहरा थारू ग्राम का दौरा कर वहां देहात संस्था की ओर से गठित बाल संसद के साथ बैठक कर बाल संसद के कार्यों व प्रयासों को जाना। दल के छात्रों ने कहा कि अमेरिका में इस प्रकार का कोई ढांचा नहीं है, जहां बच्चे अपने अधिकारों का नारा स्वयं बुलंद कर सकें।
प्रश्नोत्तर काल में अमेरिकी छात्रों से थारू बच्चों ने पूछा कि अमेरिका में जो बच्चे गरीबी के कारण नहीं पढ़ पाते हैं तो फिर वह बच्चें क्या करते है? यह सवाल सुनकर अमेरिकी दल में सन्नाटा छा गया। सभी छात्र-छात्राओं ने चुप्पी साध ली। बाद में दल ने थारू बच्चों की पोशाक को पहनकर उनकी जिंदगी जीने का तरीका जाना। काफी खुश नजर आए।
छात्र दल में न्यू मैक्सिको, न्यूयार्क, कोलोराडो, फिलाडेल्फिया, ओरेगन, मिशीगन, फ्लोरिडा, कैंलीफोर्निया, वाशिंगटन डीसी, टेक्सास समेत अन्य राज्य मेलीना, एलीसन, काहला, मिगुअल, हेस्परस, जेंडी, चैल्सिया, डेनियल, माया शर्लिन, जैकलीन, रोनाल्ड शामिल रहे। इस मौके पर देहात संस्था के प्रोफेसर आबिद सिराज, प्रो. डायोनिशियश, रमाकांत पासवान, विजय यादव, सरिता आदि मौजूद रहे।