बहराइच। मांगों को लेकर लेखपाल आंदोलन कर रहे हैं। लेखपालों की हड़ताल के 18वें दिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए धरनास्थल के गेट पर ताला जड़वा दिया। साथ ही लगे हुए टेंट को भी उखड़वा दिया गया। प्रशासन के इस रवैये से नाराज लेखपाल गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए हैं। लेखपालों ने मांगों को पूरी नहीं किए जाने तक काम पर वापस न लौटने की चेतावनी दी है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर लेखपाल 18 दिनों से हड़ताल कर रहे हैं। कलेक्ट्रेट के धरनास्थल पर लेखपालों की ओर से धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। एस्मा लगाए जाने के बाद भी लेखपालों की ओर से हड़ताल किए जाने पर प्रशासन द्वारा 10 लेखपालों को सेवा समाप्ति और 17 लेखपालों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। लेकिन हड़ताल से लेखपाल वापस हटने को नहीं तैयार थे। जिसे देखते हुए गुरुवार की रात ही प्रशासन की ओर से धरनास्थल पर लगे टेंट को उखड़वा दिया गया। साथ ही धरनास्थल के गेट पर ताला भी जड़ दिया गया।
सुबह जब लेखपाल धरना देने पहुंचे तो उन्होंने गेट बंद देखा। इससे गुस्साए लेखपालों ने गेट के सामने ही दरी बिछाकर धरना देना शुरू कर दिया। सूचना पाकर मुख्य राजस्व अधिकारी प्रदीप यादव व नगर मजिस्ट्रेट जयप्रकाश धरनास्थल पर पहुंचे। लेखपालों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन धरना खत्म करने को तैयार नहीं हुए।
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष जयराज सिंह व जिला मंत्री त्रियुगीनरायन शुक्ला ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए लेखपालों की गिरफ्तारियां भी कराई जा सकती हैं। ऐसे में दो संघर्ष समितियां बना दी गई हैं जो आंदोलन को आगे भी जारी रखेंगी। इस मौके पर आशुतोष मिश्रा, रोहित शुक्ला, महेंद्र मिश्रा, सुनील अवस्थी, कमलेश शुक्ला, मुकेश यादव, दीपिका दीक्षित, रचना यादव, मधु पांडेय, आशीष कुमार, अवधेश पांडेय, राजन पांडेय, जितेंद्र मिश्रा, महेश शुक्ला, सरवर अली, अनोखे यादव, विमल तिवारी आदि मौजूद रहे।
लेखपाल नहीं कर रहे सहयोग
जिले में शांति और कानून व्यवस्था पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है। धारा 144 लागू है। लेखपालों से सहयोग की अपेक्षा की गई थी, लेकिन उनके की ओर से सहयोग प्रदान नहीं किया गया। ऐसे में डीएम के आदेश पर धरनास्थल का गेट बंद करवा दिया गया। टेंट मालिक स्वयं अपना टेंट निकाल कर ले गए हैं। उसे उखड़वाया नहीं गया है।
- जयप्रकाश, नगर मजिस्ट्रेट