बहराइच। जिला अस्पताल में डाइट सप्लाई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। भोजन रजिस्टर पर चावल की इंट्री है लेकिन छह साल बीत गए जिला अस्पताल में मरीजों को खिचड़ी नहीं परोसी गई है।
यह बात अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की जांच से सामने आई है। बीते साल के तीन माह की आर्डर बुक भी गायब है। एडी ने रसोईघर प्रभारी व सीएमएस से अभिलेख तलब किए हैं।
मालूम हो कि अक्तूबर 2014 में कमिश्नर आरपी अरोड़ा के निरीक्षण में जिला अस्पताल में मरीजों को परोसे जाने वाली डाइट मानकों के विपरीत व गुणवत्ताविहीन मिली थी।
इस पर उन्होंने तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट जयशंकर त्रिपाठी को जांच सौंपी थी। इसके अलावा शासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए देवीपाटन मंडल के अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. उमाकांत वर्मा को जांच की जिम्मेदारी दी।
इस मामले में फार्मेसिस्ट डॉ आरबी सिंह को निलंबित कर दिया गया, जबकि बाल रोग विशेष डॉ केके वर्मा को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
अपर निदेशक बुधवार को जिला अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने अभिलेखों की गहनता से जांच की तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2008 से अब तक अभिलेख में रोटी, सब्जी, दाल व चावल की इंट्री की गई है लेकिन छह साल से अस्पताल की रसोई में चावल नहीं पकाया गया है।
जबकि गाइडलाइन के मुताबिक मरीजों को मेन्यू के मुताबिक खिचड़ी मिलनी चाहिए। प्रतिदिन औसतन सौ मरीजों को भोजन दिया जाता है लेकिन वर्ष 2014 में अगस्त से लेकर अक्तूबर तक की आर्डर बुक गायब है। एडी ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
नगर मजिस्ट्रेट की जांच पर उठाया सवाल
एडी ने कहा कि तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट जयशंकर त्रिपाठी ने चावल, दाल, आटा, तेल कुल पांच खाद्य सामग्री का नमूना लिया था। नमूनों का परिणाम आने से पहले से ही रिपोर्ट में नगर मजिस्ट्रेट ने खाद्य सामग्री गुणवत्ता विहीन बता दी। यहां तक कि नगर मजिस्ट्रेट ने सीएमएस, डॉ केके वर्मा व फार्मेसिस्ट डॉ आरबी सिंह का बयान भी नहीं दर्ज किया और रिपोर्ट मंडलायुक्त को भेज दी।
कार्य प्रभार सौंपने का दिया निर्देश
निलंबन के बाद डॉ. आरबी सिंह ने अपना कार्यभार अभी तक नहीं सौंपा है जबकि निलंबन कार्रवाई को दो माह से अधिक समय हो चुका है। एडी ने डॉ सिंह को तत्काल कार्यभार देने व बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है।