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Bahraich News: गेरुआ नदी की गोद में घड़ियालों की नई पीढ़ी, 500 बच्चों ने खोलीं आंखें

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कतर्नियाघाट में गेरुआ नदी के टापू पर घोसले से निकलकर नदी में गए नन्हे घड़ियाल।
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बिछिया। नेपाल से निकलकर कतर्नियाघाट के जंगलों के बीच बहने वाली गेरुआ नदी इन दिनों जीवन की नई कहानी लिख रही है। नदी के रेतीले टापुओं पर दो महीने पहले मादा घड़ियालों ने जो अंडे सहेजे थे, उनमें से अब बच्चे बाहर आने लगे हैं। इससे वन विभाग के साथ वन्यजीव प्रेमियों में भी उत्साह है।
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इस वर्ष गेरुआ के टापू पर मादा घड़ियालों ने करीब 30 स्थानों पर अंडे सहेजे थे। कतर्नियाघाट के वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि तीन दिनों में अब तक 18 नेस्ट खुल चुके हैं, जिनसे 500 से अधिक नन्हे घड़ियाल बाहर निकल चुके हैं। अधिकांश बच्चे अपनी माताओं के साथ गेरुआ नदी की धारा में चले गए हैं, जबकि कुछ को सुरक्षित कतर्नियाघाट स्थित घड़ियाल संरक्षण केंद्र के तालाब में रखा गया है, जहां उनकी निगरानी की जा रही है।

वन विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में शेष नेस्ट भी खुलने की संभावना है। टापू क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी प्रकार की मानवीय दखल या प्राकृतिक खतरे से बचे अंडों को नुकसान न पहुंचे। डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि गेरुआ नदी देश के महत्वपूर्ण घड़ियाल प्रजनन स्थलों में शामिल है। इस वर्ष बड़ी संख्या में बच्चों का निकलना संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। वन विभाग सभी घोंसलों की निगरानी कर रहा है।
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एक घोंसले में होते हैं औसतन 30 अंडे
कतर्नियाघाट के वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि मादा घड़ियाल मार्च-अप्रैल के दौरान गेरुआ नदी के रेतीले टापुओं पर घोंसले बनाकर अंडे देती हैं। एक घोंसले में औसतन 30 अंडे होते हैं। करीब 70 से 80 दिन बाद अंडों से बच्चे बाहर निकलते हैं। इस वर्ष 30 नेस्ट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 18 नेस्ट खुल चुके हैं और 500 से अधिक नन्हे घड़ियाल बाहर आ चुके हैं।

कतर्नियाघाट में गेरुआ नदी के टापू पर घोसले से निकलकर नदी में गए नन्हे घड़ियाल।

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