उर्रा (बहराइच)। मिहींपुरवा सीएचसी पर स्वास्थ्यकर्मियों की संवेदनहीनता का एक और मामला प्रकाश में आया है। एक प्रसव पीड़िता यहां 14 घंटे कराहती रही लेकिन एएएनम ने 10 हजार रुपये की मांग न पूरी होने तक प्रसव कराने से इन्कार कर दिया। किसी तरह 700 रुपये लेकर पति ने एएनएम को थमाया तो उसने इलाज शुरू किया। अंधेरे में प्रसव कराया गया लेकिन थोड़ी ही देर में नवजात की मौत हो गई। प्रसूता की हालत भी नाजुक बनी हुई है। पीड़िता के पति ने सीएमओ को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मुर्तिहा कोतवाली अंतर्गत महाराज सिंह नगर गांव निवासी बिंद्रा की पत्नी कंचना देवी (28) को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सुबह करीब 6 बजे उसे मिहींपुरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। यहां तैनात एएनएम लाली मिश्रा ड्यूटी पर मिलीं। उन्होंने कंचना की नब्ज टटोलते हुए प्रसव का समय पूर्ण न होने की बात कही। बिंद्रा को घर जाने की सलाह दे डाली लेकिन कंचना की हालत बिगड़ती देख बिंद्रा ने इलाज शुरू करने की बात कही। इस पर एएनएम ने इलाज के बदले दस हजार रुपये की डिमांड की। यह सुन बिंद्रा अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इलाज की मिन्नतें करने लगा लेकिन एएनएम का दिल नहीं पसीजा। देर शाम बिंद्रा सात सौ रुपये लेकर सीएचसी पहुंचा और एएनएम को दिए, इसके बाद इलाज शुरू हुआ। अंधेरे में कंचना का प्रसव कराया गया लेकिन थोड़ी ही देर में नवजात ने दम तोड़ दिया। कंचना की हालत भी नाजुक है। बिंद्रा ने अपने नवजात बेटे की मौत का जिम्मेदार एएनएम को ठहराया है। उसने कहा कि एएनएम ने किसी भी डॉक्टर को यह सूचना नहीं दी है। बिंद्रा ने सोमवार को सीएमओ डॉ. जेएन मिश्रा को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।