बहराइच (ब्यूरो)। बरेली में बस हादसे की सूचना मिलते ही बस में सवार लोगों के मित्र और परिवारीजन वाहनों का इंतजाम कर बरेली के लिए रवाना हो गए। शाम पांच बजे के आसपास सभी बरेली पहुंच चुके थे। लेकिन बस हादसे में दम तोड़ने वाले 12 लोगों में सिर्फ नौ लोगों की पहचान होने की ही बात बताई जा रही है। तीन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। बस हादसे की सूचना भोर से जिले के लोगों को मिलनी शुरू हो गई थी। सूचना के बाद परेशान परिवारीजन वाहनों का इंतजाम कर बरेली के लिए रवाना हो गए। कैसरगंज के प्यारेपुर निवासी समाजसेवी और सपा नेता अशद रकीम भी गांव के लोगों की स्थिति जांचने के लिए परिवारीजनों को साथ लेकर बुधवार दोपहर बाद बरेली पहुंचे। मोबाइल पर बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि बस हादसे में 12 लोगों की मौत हुई है। लेकिन सिर्फ नौ शवों की ही शिनाख्त हो सकी है। अब तक तीन शव किन ग्रामीणों के हैं, पता नहीं चल सका है। उन्होंने बताया कि जो लोग जख्मी हुए हैं, उनमें 15 लोगों की हालत काफी नाजुक है।
खलिहान का काम निपटने से बस में थी अधिक भीड़ ः कैसरगंज क्षेत्र के लोग बताते हैं कि सप्ताह भर में दो बार दिल्ली के लिए रवाना होने वाली बस में 70 से 80 लोग ही सवार होते थे। लेकिन इस बार संख्या अधिक इसलिए हुई क्योंकि हाल ही में गेहूं की कटाई का काम निपटा था। किसान और मजदूरीपेशा वर्ग के लोग घरों में फुर्सत में थे। जिसके चलते दिल्ली जाकर इन सभी ने कुछ दिन नौकरी कर पैसा कमाने की योजना बनाई थी।