फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फुहारों से 2013 की विदाई, कांपा तराई

Wed, 01 Jan 2014 05:45 AM IST
Bahraich
विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। वर्ष 2013 ने रिमझिम फुहारों के बीच विदाई ली। साल के आखिरी दिन की शुरुआत फुहारों से हुई, फिर हल्की धूप और फिर से बूंदाबांदी का दौर रुक-रुक कर जारी रहा। इस बीच सर्द हवाओं के कारण लोग कंपकंपा उठे। वर्षा चार मिलीमीटर रिकॉर्ड हुई और तापमान लुढ़ककर सात डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम के इस रुख से लोगों को थोड़ी मायूसी जरूर हुई लेकिन नए साल का उत्साह बरकरार रहा। लोग छतरी लेकर बाजार में खरीदारी करते नजर आए।
विज्ञापन

मंगलवार की सुबह रिमझिम फुहारों के बीच हुई। दस बजे तक रुक-रुक कर बूंदें पड़ती रहीं। इस कारण दफ्तरों को जाने वाले लोग काफी परेशान हुए। इसके बाद वर्षा का क्रम थमा। दोपहर 12:30 बजे के आसपास हल्की धूप निकली लेकिन आधे घंटे में ही सूरज फिर बादलों में छिप गया। तेज हवा के साथ बूंदाबांदी पूरे दिन होती रही, जिसके चलते घरोें से निकले लोग बूंदों से बचने की जुगत में रहे। हालांकि, नए साल का जश्न मनाने के लिए लोग खरीदारी करने उमड़े।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के चलते पश्चिमी विक्षोभ की स्थिति उत्पन्न हुई है। बर्फीली हवा ने तराई का मौसम बिगाड़ा है। उन्होंने कहा कि चार मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई है। अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस मापा गया है। पश्चिमोत्तर दिशा में हवाएं 13 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलीं, जिससे लोगों को ठिठुरन का एहसास हुआ।
विज्ञापन

कतर्निया गए लोगों के अरमानों पर फिरा पानी
कतर्नियाघाट के जंगल में जिन लोगों ने नए वर्ष के स्वागत की तैयारी की थी, उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। बहराइच में तो मौसम का मिजाज बनता बिगड़ता रहा लेकिन जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति कतर्निया में पूरे दिन फुहारें पड़ती रहीं, जिससे गेस्ट हाउस में ठहरे लोग अंदर ही दुबके रहे। वर्षा के चलते जंगल की पगडंडियां कीचड़ से सन गईं हैं।
पछेती गेहूं और आलू की फसल को नुकसान
बहराइच। मंगलवार को बेमौसम हुई बरसात से तराई में पछेती गेहूं और आलू की फसल को आंशिक नुकसान होने की संभावना कृषि वैज्ञानिक जता रहे हैं। फसल अनुंसधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एमवी सिंह ने कहा कि सिर्फ चार मिलीमीटर वर्षा हुई है, फिर भी पछेती गेहूं की जो फसल 10 दिन पहले र्बोई गई थी, उसे 15 से 20 फीसदी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा आलू के खेत में नालियों में अगर पानी जमा रहा तो झुलसा रोग फसल को बर्बाद कर सकता है। उन्होंने कहा कि अरहर, मसूर, सरसो फसलों को हल्की वर्षा से फायदा पहुंचेगा। खेतों में खड़ी मटर की फसल को भी आंशिक नुकसान की संभावना है। अगर वर्षा के बाद बदली का दौर चार से पांच दिन लगातार जारी रहा तो सरसों की फसल में माहू का प्रकोप फैल सकता है, ऐसे में किसान सावधान रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें