नानपारा (बहराइच)। ग्रामीण अंचलों में महिला डॉक्टरों की सुरक्षा के इंतजाम सरकार नहीं कर रही है। अन्य चिकित्सक भी असुरक्षित हैं, जिसके चलते डॉक्टर गांवों में नहीं रुकना चाहते हैं। पैथोलॉजी और क्लीनिकों के के निरीक्षण के लिए गुरुवार दोपहर नानपारा पहुंचे सीएमओ ने ये बातें कहीं। व्यवस्था के प्रति लाचार दिखे सीएमओ सीएमओ ने कहा कि 174 के सापेक्ष 64 डॉक्टर ही मौजूद हैं, ऐसे में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर कैसे हो? आखिर व्यवस्था कैसे करें?
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. उमाकांत वर्मा गुरुवार दोपहर नानपारा नगर में पहुंचे। उन्होंने नानपारा के आधुनिक व उन्नति पैथाेलॉजी का निरीक्षण किया। संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए फिर सीएचसी पहुंचकर व्यवस्थाएं जांची। गंदगी और अव्यवस्था के बावजूद सीएमओ को सब कुछ ठीक ठाक लगा। भनक लगते ही पत्रकार मौके पर पहुंच गए। ग्रामीण अंचलों के स्वास्थ्य केंद्रों पर तालाबंदी के बाबत सवाल पूछने पर सीएमओ ने कहा कि 174 डॉक्टरों के पद जिले में स्वीकृत हैं लेकिन सिर्फ 64 की तैनाती है। ऐसे में कहां तैनाती करें कहां न करें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टरों को सरकार सुरक्षा मुहैया नहीं करा रही है। डॉक्टर असुरक्षित हैं, रुकना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि एसपी से सुरक्षा की मांग की जाती है तो वह दरोगा पर जिम्मेदारी छोड़ देते हैं और दरोगा सुनते नहीं हैं। सीएमओ ने कहा कि जैसा चल रहा है, वैसा ही चलेगा।
तड़पती रही महिला और सीएमओ करते रहे मीटिंग
नानपारा (बहराइच)। वह ठेलिया पर पड़ी दर्द से कराहती रही। तेज बुखार के कारण कांप रही थी। दो घंटे तक कोई भी डॉक्टर न ही चिकित्साकर्मी उसे देखने आया। सभी सीएमओ के साथ मीटिंग में व्यस्त थे। ये स्थिति गुरुवार दोपहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानपारा में देखने को मिली। कोतवाली नानपारा अंतर्गत नरकोटिया गांव निवासी अनवरी (52) पत्नी मोहम्मद अयूब कई दिनाें से पेट दर्द और बुखार से पीड़ित है। गुरुवार को पति मोहम्मद अयूब पत्नी को ठेलिया पर 1:15 बजे के आसपास सीएचसी पहुंचा। यहां उसने डॉक्टर को दिखाने की कोशिश की लेकिन पता चला कि सभी चिकित्सक सीएमओ के साथ बैठक कर रहे हैं। बैठक तीन बजे तक चली, जिसके चलते दो घंटे तक महिला ठेलिया पर पेट दर्द से कराहती रही। इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. उमाकांत से बात की गई तो पहले वह चुप रहे। फिर बोले, जो चाहे लिख दीजिए।