महसी (बहराइच)। घाघरा की कटान से विस्थापित होकर तटबंध व सड़क की पटरियों के किनारे झुग्गी-झोपड़ी रखकर गुजर बसर कर रहे 1627 परिवारों को तहसील प्रशासन स्थाई रूप से पुनर्वासित करेगा। इसके लिए 15 गांवों में 34.247 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। राजस्व कर्मियों को चिन्हित जमीन पर साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। सप्ताह भर बाद पुनर्वासित करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
वर्तमान में महसी के बेलहा-बेहरौली और कैसरगंज के आदमपुर रेवली तटबंध पर पांच हजार से अधिक परिवार विस्थापित की जिंदगी जी रहे हैं। इन कटान पीड़ितों को पुनर्वासित करने के लिए तहसील प्रशासन ने जमीन का चिह्नीकरण किया है। महसी तहसील के चूड़ामणि, बौंडी, घुरेहरीपुर, नौबस्ता, पिपरी, गोलागंज, संसारी, कोढ़वा समेत 14 गांवों के 1627 कटान पीड़ित परिवारों को 15 गांवों में ग्राम समाज की भूमि पर पुनर्वासित किया जाएगा। उपजिलाधिकारी महसी बीके सिंह ने बताया कि इसके लिए 34.247 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित किया गया है। यह ग्राम समाज की जमीन है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कटान पीड़ित परिवार को 253 वर्ग मीटर जमीन मुहैया करायी जाएगी। इसके लिए राजस्व कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि सप्ताह भर बाद जमीन आवंटन की कार्रवाई शुरू होगी।
इन गांवों में बसाए जाएंगे कटान पीड़ित
धर्मापुर, बेहटा, बौंडी, बलदूपुरवा, पिपरा, भौंरी, अंगरौरा, दुबहा, गलकारा, मैकूपुरवा, बेहड़ा, नरोत्तमपुर, नसीरपुर, सिंगिया।