बहराइच। घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कटान के कारण महसी और कैसरगंज में 12 मकान और छह बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो गई है।
जरवल में गड़रियनपुरवा का शिव मंदिर नदी के निशाने पर आ गया है। कटान तेज होने से ग्रामीण परेशान हैं। सभी गृहस्थी समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
तराई में दो दिन तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद अब रुक-रुक कर बरसात हो रही है। नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा का क्रम निरंतर जारी है। नेपाली नदियों से आने वाला पानी घाघरा नदी के उफान का सबब बना हुआ है।
गिरिजापुरी बैराज, शारदा और बनबसा बैराज से लगभग दो लाख क्यूसेक पानी घाघरा में डिस्चार्ज हो रहा है। नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर शनिवार को 106.276 मीटर रिकॉर्ड हुआ, जबकि खतरे का निशान 106.07 है।
यहां नदी लाल निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गई है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मुताबिक आगामी 12 घंटे बाद पुन: जलस्तर में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं।
नदी के उफनाने के कारण महसी और कैसरगंज में तेज कटान हो रही है। महसी के कोठार व गोलागंज में छह ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं।
कैसरगंज के गोड़हिया अंतर्गत कुम्हारनपुरवा में बदलू, शिवनाथ, लल्लू, ननकऊ, पार्वती समेत छह ग्रामीणों के मकानों को नदी की लहरों ने काटकर समाहित कर लिया है।
60 बीघा खेती योग्य जमीन नदी की भेंट चढ़ी है। जरवलरोड अंतर्गत गड़रियनपुरवा में अति प्राचीन शिव मंदिर नदी के निशाने पर है। मंदिर से नदी की दूरी महज 50 मीटर है। कटान तेज होने के कारण ग्रामीण गृहस्थी समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
राजस्वकर्मी कर रहे कैंप, मिलेगा मुआवजा
नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। लेकिन अभी गंभीर हालात नहीं हैं। लेखपाल व राजस्व निरीक्षक की ड्यूटी लगाई गई है।
सभी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। बाढ़ चौकियां भी स्थापित हैं। उप जिलाधिकारियों को भी अलर्ट किया गया है। एनडीआरएफ की टीम क्षेत्र में कैंप कर रही है।
बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होन पर हरसंभव मदद पहुंचायी जाएगी। सारी तैयारियां पूरी है। जिन लोगों के मकान या खेत कट रहे हैं, राजस्वकर्मी उनकी सूची बना रहे हैं। उसी के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
-रामसुरेश वर्मा, अपर जिलाधिकारी