बहराइच। बाराबंकी की सीमा समाप्त होते ही रुपईडीहा तक की सड़क को फोरलेन किया जाएगा। यह कार्य दो चरणों में होगा। पहले चरण में जरवल से बहराइच के झिंगहाघाट तक 64़ 9 किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी। इसके लिए 66 गावों के 1825 किसानों से 275़ 83 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। प्रथम चरण के लिए संयुक्त रूप से भूमि के भौतिक सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है। यह परियोजना स्पेशल प्रोजेक्ट की श्रेणी में है। इसलिए किसानों से सीधे भूमि अधिग्रहण की जाएगी। इसके लिए एसआईए की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।
जरवलरोड़-रूपईडीहा नेशनल हाईवे का निर्माण बहराइचवासियों के लिए लाभदायक साबित होगा। विशेषकर लखनऊ, कानपुर से रूपईडीहा जाने वालों के लिए यह नेशनल हाईवे सुविधाजनक होगा। इसी कारण के से स्थानीय लोग इस परियोजना को लेकर उत्साहित है। इस पूरी परियोजना को दो भागों में बांटा गया है। पहले चरण में जरवल, जहां से बाराबंकी जिले की सीमा समाप्त होती है। वहां से बहराइच के झिंगहाघाट तक 64़ 9 किलोमीटर सड़क का निर्माण होगा। इस फेज में 66 गांवों से होकर हाईवे गुजरेगा। इसके लिए 275़ 83 हेक्टेअर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस फेज की परियोजना से 1825 किसान प्रभावित होगे। पहले फेज के लिए भूमि के भौतिक सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है।
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हाईवे से कुछ बाजारों में छोटे व्यापारियों को होगा नुकसान
फोरलेन निर्माण से रास्ते में पड़ने वाले छोटे बाजार के भवन को भी तोड़ जाएगा। उसका मुआवजा भी मिलेगा, लेकिन जिनकी जमीन अभी सड़क से दूर है। उनकी जमीन चौड़ीकरण के बाद हाइवे से नजदीक हो जाएगी।
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एनएचआई की ओर से सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव मिला है, जिस भूमि की आवश्यकता है। उसका भौतिक सत्यापन हो रहा है। पहले फेज के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ हो जाएगी।
शालिनी प्रभाकर भूमि अधिग्रहण अधिकारी
खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद