बहराइच। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कारीकोट, गिरिजापुरी समेत चार गांवों में बाघ की दहाड़ से ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है। ग्रामीण रात जागकर बिता रहे हैं। सूचना रेंज कार्यालय को दी गई है।
अब तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हुए हैं। गांव के लोग खेत खलिहान जाने से भी डरते हैं। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटे गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी बाघ और तेंदुए के हमले से हमेशा दांव पर रहती है।
गिरिजापुरी-कारीकोट मार्ग पर स्थित स्कूल के निकट बीते सप्ताह अचानक बाघ मार्ग पर पहुंच गया था। इस घटना से अभी लोग उबरे भी नहीं थे कि तीन दिन से गिरिजापुरी, कारीकोट, चफरिया, नई बस्ती के निकट रात में बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ रही है।
ऐसे में शाम ढले ही ग्रामीण घरों में कैद होने को विवश रहते हैं। ग्रामीणों ने कई बार सूचना रेंज कार्यालय पर दी लेकिन अब तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
कारीकोट निवासी राधेश्याम और गिरिजापुरी निवासी मुन्ना का कहना है कि गिरिजापुरी मार्ग पर तो आए दिन शाम के समय बाघ पहुंचकर घंटों दहाड़ता है।
ऐसे में खेत खलिहान जाना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि रेंज के अधिकारियों से बात की गई थी तो सभी ने गोला पटाखा दागने की सलाह देकर किनारा कस लिया।
डीएफओ जीपी सिंह ने कहा कि जानकारी नहीं थी। क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाई जाएगी। ग्रामीणों को भी सजग रहना होगा।