फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bahraich News: मर्जर नीति की भेंट चढ़ी 46 बच्चों की कॉपी-किताब, घर पर खेल रहे

Tue, 22 Jul 2025 01:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
विज्ञापन
पयागपुर में सहसरांवा गांव में मर्जर विद्यालय जाने वाले रास्ते में स्थित नहर। -संवाद
विज्ञापन
पयागपुर (बहराइच)। शासन की ओर से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का उनके नजदीकी विद्यालय में विलय किया जा रहा है। इसके तहत शिक्षा क्षेत्र पयागपुर के प्राथमिक विद्यालय सहसरावां, मैना, राजापुर कला, सिपहिया, राम सुधिपुरवा, धौकल पुरवा, भाटन पुरवा, खुनौरा, बभनपुरवा व बघैया का विलय किया गया है। यह विलय कई छात्र-छात्राओं के लिए मुसीबत बन गया है और उनकी पढ़ाई बाधित हो गई है। विलय के बाद शिक्षक तो संबंधित विद्यालय में चले गए हैं लेकिन बच्चे नहीं जा रहे हैं।
विज्ञापन



सबसे ज्यादा परेशानी प्राथमिक विद्यालय सहसरावां खास के बच्चों को हो रही है। सहसरावां में मुरावनपुरवा, मिश्रनपुरवा, अहिरन पुरवा व पल्टनपुरवा के 46 नौनिहाल पढ़ते थे लेकिन 30 सालों से संचालित इस विद्यालय का शासन की मर्जर नीति के तहत शिवशंकर पुरवा स्थित विद्यालय में विलय कर दिया गया है। इसके चलते विद्यालय के बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है। इस विद्यालय में अध्ययनरत 46 बच्चे अपने घर बैठ गए हैं।



संकरा नहर पुल बन सकता है हादसे का कारण
प्राथमिक विद्यालय सहसरावां व मर्ज किए गए विद्यालय शिव शंकरपुरवा के बीच की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है। शंकरपुरवा जाने वाले मार्ग के बीच से सरयू नहर की मुख्य नहर गुजरी है। इस नहर पर बना पुल भी काफी संकरा है। इसे लेकर अभिभावक सहमे हुए हैं। अभिभावक छोटे-छोटे बच्चों के नहर में डूबने की आशंका से सहमे हुए हैं।
विज्ञापन




मर्जर विद्यालय में संसाधनों की भी कमी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्राथमिक विद्यालय शिव शंकरपुरवा में संसाधनों का भी अभाव है। विद्यालय में कुल तीन कमरे हैं और उनमें पांच कक्षाओं का संचालन होता है। यही नहीं, विद्यालय में मात्र तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र तैनात है। विद्यालय में खेल मैदान भी नहीं है।



नहर से हादसे की आशंका
सहसरावां निवासी योगेंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि बेटा मानस कक्षा दो में व बेटी सौम्या तीन में पढ़ती है। रास्ते में लबालब नहर पड़ने के कारण हादसे का खतरा है जिससे बच्चों को स्कूल नहीं जाने दे रहे हैं।

कुत्तों का है डर
सहसरांवा निवासी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उनकी बेटी नेहा तिवारी छोटी है, वह कक्षा दो में पढ़ती है। जिले में कुत्तों के हमले बढ़े हैं, ऐसे में उसको डेढ़ किमी दूर स्कूल भेजने में डर लग रहा है।

बेटी की सुरक्षा का खतरा
सहसरांवा निवासी सुनीता देवी ने बताया कि बेटी सोनिया कक्षा पांच में पढ़ती है। उसे अकेली डेढ़ किलोमीटर भेजने में डर लगता है।

नहर का खतरा
सहसरांवा निवासी पुष्पा देवी ने बताया कि बेटा संदीप पढ़ने जाता है लेकिन नहर पार करके बेटे को पढ़ने के लिए नहीं भेज सकती हूं। बड़ा और समझदार होने के बाद भेजा जाएगा।



बच्चों को मर्जर विद्यालय में भेजने के लिए शिक्षक अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं। मर्जर विद्यालय में बच्चों को कोई असुविधा न हो, इसका भरपूर प्रयास रहेगा।
विज्ञापन

-डाली मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी, पयागपुर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें